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डूंगरपुर: भीषण गर्मी में छुट्टियां घटाने पर भड़के शिक्षक, कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर शिक्षा मंत्री का पुतला फूंका

राजस्थान में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच ग्रीष्मकालीन अवकाश में कटौती के फैसले ने शिक्षकों के आक्रोश को भड़का दिया है. शुक्रवार को राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत) की जिला कमेटी ने डूंगरपुर कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया. शिक्षकों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की और शिक्षा मंत्री का पुतला फूंककर अपना विरोध दर्ज कराया.

50 डिग्री तापमान में स्कूल खोलना तर्कहीन

राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत) के प्रदेश उपाध्यक्ष हेमंत खराड़ी ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि राजस्थान की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए जून के महीने में पारा अक्सर 50°C तक पहुंच जाता है. ऐसे में ग्रीष्मकालीन अवकाश में 10 दिन की कटौती करना और संस्था प्रधानों के विवेकाधीन अवकाश को कम करना पूरी तरह तर्कहीन है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब स्कूलों में पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और गर्मी से बचाव के साधन शून्य हैं, तो ऐसी स्थिति में बच्चों और शिक्षकों को स्कूल बुलाना उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है.

लंबे समय से लंबित हैं मांगें

शिक्षकों का कहना है कि वे काफी समय से ब्लॉक और जिला मुख्यालयों पर शांतिपूर्ण विरोध कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी वाजिब मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है. जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में संगठन ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:

  • अवकाश बहाली: ग्रीष्मकालीन अवकाश में की गई 10 दिनों की कटौती को तुरंत निरस्त कर पुरानी व्यवस्था लागू की जाए.
  • बकाया भुगतान: पोषाहार (MDM) और ट्रांसपोर्ट वाउचर का लंबे समय से रुका हुआ भुगतान तुरंत किया जाए.
  • संसाधन और स्टाफ: सभी विद्यालयों में रिक्त पदों पर पर्याप्त स्टाफ नियुक्त किया जाए और बिजली-पानी के साथ कमरों की उचित व्यवस्था हो.
  • स्थानांतरण नीति: शिक्षकों के लिए एक स्थायी और पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू की जाए.

आंदोलन की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इन मांगों पर जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो संगठन प्रदेश स्तर पर एक बड़ा और तीव्र आंदोलन शुरू करेगा. शिक्षकों के इस प्रदर्शन से प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है. अब देखना यह है कि भीषण गर्मी और शिक्षकों के इस विरोध के बीच सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करती है या नहीं.

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