डूंगरपुर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अंतर्गत कार्यरत कनिष्ठ तकनीकी सहायक (JTA) अपनी मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई में हैं. ‘वीबी जीरामजी (नरेगा) कार्मिक संघ’ के बैनर तले डूंगरपुर जिले के समस्त जेटीए पिछले 7 दिनों से कलेक्ट्रेट के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं. सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया कि यदि सरकार ने जल्द उनकी सुध नहीं ली, तो आगामी 1 मई को सभी कार्मिक सामूहिक इस्तीफा सौंप देंगे.
दोहरी रणनीति का आरोप, कार्य विभाजन पर नाराजगी
धरना दे रहे संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि विभाग द्वारा जेटीए के प्रति “दोहरी रणनीति” अपनाई जा रही है. पूर्व में जेटीए और जेईएन के बीच नवीन कार्य विभाजन को लेकर जो आदेश जारी हुए थे, उन्हें विभाग ने स्थगित कर दिया है. कार्मिकों का कहना है कि पर्याप्त संख्या में जेईएन उपलब्ध होने के बावजूद जेटीए पर काम का अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है, जबकि पंचायती राज की अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं का प्रभार उनसे छीन लिया गया है.
नियमितीकरण और पदोन्नति की मुख्य मांग
जेटीए मंडल की प्रमुख मांगों में पिछले कई वर्षों से लंबित नियमितीकरण का मुद्दा सबसे ऊपर है. इसके अलावा, संघ की मांग है कि:
- नरेगा कार्यों की उपयोगिता एवं पूर्णता प्रमाण पत्र पर वित्तीय सीमा तक संयुक्त हस्ताक्षर का अधिकार जेटीए को दिया जाए.
- 9 से 18 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले जेटीए को भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार वरिष्ठ तकनीकी सहायक (STA) के पद पर संविदा पर ही पदोन्नत किया जाए.
1 मई को होगा बड़ा फैसला
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि सरकार उनकी जायज मांगों को अनसुना कर रही है. यदि इस सप्ताह के अंत तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को उग्र किया जाएगा. इसी क्रम में 1 मई को जिले के समस्त कनिष्ठ तकनीकी सहायक अपना सामूहिक इस्तीफा सरकार को भेजकर विरोध दर्ज कराएंगे. फिलहाल हड़ताल के कारण जिले में नरेगा और विकास कार्यों की गति धीमी पड़ गई है.

