डूंगरपुर शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी पर लगाम लगाने और आमजन को राहत देने के लिए डूंगरपुर नगर परिषद ने एक विशेष अभियान का बिगुल फूंक दिया है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और निदेशालय स्तर से मिले आदेशों के बाद, नगर परिषद द्वारा ‘एनिमल बर्थ कंट्रोल’ (ABC) कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है.
इस अभियान का दोहरा फायदा होगा—एक तरफ जहाँ आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित होगी, वहीं दूसरी तरफ एंटी-रेबीज टीकाकरण होने से शहरवासी खुद को अधिक सुरक्षित महसूस कर सकेंगे.
नियमों का सख्ती से पालन, छोटे पिल्ले और धात्री माताएं प्रक्रिया से बाहर
नगर परिषद आयुक्त प्रकाश डूडी ने बताया कि इस पूरे अभियान के दौरान पशु क्रूरता निवारण नियमों और सरकारी गाइडलाइन्स का सख्ती से पालन किया जा रहा है. इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि दूध पीते छोटे पिल्लों और उनकी माताओं को इस नसबंदी प्रक्रिया से पूरी तरह दूर रखा जाए.
ऑपरेशन से लेकर रिकवरी तक की पूरी प्रक्रिया
अभियान के तहत शहर के विभिन्न वार्डों और इलाकों से आवारा कुत्तों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर नगर परिषद के शेल्टर होम लाया जा रहा है. यहाँ सर्जरी से एक दिन पहले कुत्तों को भोजन देना बंद किया जाता है. इसके बाद नर कुत्तों की ‘स्प्रेइंग’ और मादा कुत्तों की ‘ओवेरियोहिस्टेरेक्टॉमी’ (नसबंदी सर्जरी) की जाती है.
सर्जरी पूरी होने के बाद लगभग तीन दिनों तक कुत्तों को ‘पोस्ट-ऑपरेटिव केयर’ (विशेष देखरेख) में रखा जाता है. जब कुत्ते पूरी तरह स्वस्थ और रिकवर हो जाते हैं, तो उन्हें वापस उसी इलाके में छोड़ दिया जाता है जहाँ से उन्हें पकड़ा गया था.
शेल्टर होम में गर्मी से बचाव के पुख्ता इंतजाम
भीषण गर्मी को देखते हुए शेल्टर होम में पशुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं. कुत्तों को रखने के लिए अलग-अलग केबिन बनाए गए हैं, जिनमें पंखे लगाए गए हैं. इसके अलावा, कुत्तों को दिन में दो बार पौष्टिक भोजन और तीन से चार बार ठंडा पानी दिया जा रहा है ताकि उन्हें किसी भी तरह की परेशानी न हो. नगर परिषद का दावा है कि आगामी दो महीनों में इस अभियान के सकारात्मक परिणाम दिखने लगेंगे और शहरवासियों को आवारा कुत्तों के आतंक से बड़ी राहत मिलेगी.

