डूंगरपुर आदिवासी बाहुल्य डूंगरपुर जिले के आबकारी विभाग ने राजस्व संग्रहण में प्रदेशभर में एक बार फिर नया कीर्तिमान स्थापित किया है. वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, डूंगरपुर जिले ने अपने निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक राजस्व प्राप्त कर पूरे राजस्थान में प्रथम स्थान हासिल किया है. यह लगातार दूसरा साल है जब डूंगरपुर आबकारी विभाग ने बड़े-बड़े शहरों को पछाड़ते हुए शीर्ष स्थान पर कब्जा जमाया है.
लक्ष्य से 3.26% अधिक राजस्व की प्राप्ति
जिला आबकारी अधिकारी भरत मीणा ने बताया कि राज्य सरकार ने डूंगरपुर जिले के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में 372.26 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया था. विभाग ने बेहतरीन कार्यप्रणाली और मॉनिटरिंग के दम पर 384.42 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया. यह सरकारी लक्ष्य के मुकाबले 3.26 फीसदी अधिक है.
गौरतलब है कि इससे पिछले वित्तीय वर्ष (2024-25) में भी जिले ने 274.25 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 302.99 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाकर प्रदेश में पहला स्थान पाया था. जिले में वर्तमान में शराब की कुल 50 दुकानें संचालित हैं.
सफलता के पीछे ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति
आबकारी अधिकारी ने इस उपलब्धि का श्रेय राज्य सरकार की लोक-कल्याणकारी आबकारी नीति और आबकारी आयुक्त के कुशल मार्गदर्शन को दिया है. सफलता के मुख्य कारणों में निम्नलिखित बिंदु अहम रहे:
- नियमित निरीक्षण: आबकारी निरीक्षकों द्वारा मदिरा दुकानों का सतत निरीक्षण किया गया और अनुज्ञाधारियों को अधिक मदिरा उठाव के लिए प्रोत्साहित किया गया.
- अवैध शराब पर लगाम: जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के समन्वय से जिले में अवैध मदिरा के निर्माण, परिवहन और भंडारण पर प्रभावी अंकुश लगाया गया.
- कड़ी कार्रवाई: अन्य राज्यों (विशेषकर पड़ोसी राज्य गुजरात बॉर्डर) से होने वाली शराब की तस्करी और अवैध बिक्री के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए निरोधात्मक कार्रवाई की गई.
सरकार के खजाने में बड़ा योगदान
डूंगरपुर जैसे छोटे और आदिवासी बाहुल्य जिले का राजस्व के मामले में प्रदेश में टॉप करना प्रशासनिक दक्षता को दर्शाता है. विभाग की इस सक्रियता से न केवल सरकार का खजाना भरा है, बल्कि अवैध शराब के कारोबार पर भी बड़ी चोट पहुंची है. इस शानदार उपलब्धि पर विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में उत्साह का माहौल है.

