राजसमंद वैश्विक युद्ध की भीषण आंच अब राजस्थान के राजसमंद जिले की आर्थिक कमर तोड़ रही है. देश की सीमा से दूर चल रहे इस संघर्ष का सीधा असर यहाँ की विश्वप्रसिद्ध मार्बल इंडस्ट्री, माइंस और पाउडर प्लांट्स पर पड़ने लगा है. जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में सन्नाटा पसर गया है और करीब 1000 माइंस व कारखानों के पहिये थमने की कगार पर हैं.
मोरबी के प्लांट बंद होने से टूटा आपूर्ति चक्र
राजसमंद की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा मार्बल वेस्ट पर आधारित है. यहाँ की माइंस से निकलने वाले वेस्ट को पाउडर प्लांट्स में प्रोसेस कर पाउडर बनाया जाता है, जिसे गुजरात के मोरबी भेजा जाता है. मोरबी के टाइल्स और सिरेमिक उद्योग में इस पाउडर की भारी मांग रहती थी. लेकिन युद्ध के कारण मोरबी में गैस की किल्लत और अन्य कारणों से करीब 1000 गैस आधारित प्लांट बंद हो गए हैं. इसका सीधा “डोमिनो इफेक्ट” राजसमंद पर पड़ा है, जहाँ अब 80 प्रतिशत पाउडर प्लांट पूरी तरह ठप हो चुके हैं.
50 हजार मजदूरों पर संकट, पलायन शुरू
इस औद्योगिक मंदी ने मानवीय संकट खड़ा कर दिया है. जिले के इन प्लांट्स और माइंस में लगभग 50 हजार मजदूर अपनी आजीविका चला रहे थे. हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि जिन फैक्ट्रियों में कभी 25 से 30 मजदूर दिन-रात काम करते थे, वहां अब केवल 1-2 गार्ड रखवाली के लिए तैनात हैं. काम न मिलने के कारण अधिकांश मजदूर अब अन्य राज्यों या अपने गांवों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं
व्यापारियों की बढ़ती मुश्किलें
छोटे और मध्यम वर्गीय (MSME) व्यापारियों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है. आमदनी शून्य होने के बावजूद बिजली के बिल, मशीनों का मेंटेनेंस और बैंक किस्तों का बोझ उन्हें कर्ज के दलदल में धकेल रहा है. स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि जल्द ही युद्ध विराम नहीं हुआ या सरकार ने कोई राहत पैकेज नहीं दिया, तो राजसमंद की मार्बल इंडस्ट्री को उबड़ना मुश्किल हो जाएगा.

