प्रतापगढ़ छोटी सादड़ी उपखंड क्षेत्र के अफीम काश्तकारों के लिए इन दिनों व्यस्तता का समय है। छोटी सादड़ी स्थित हिंदू धर्मशाला में अफीम तौल का कार्य सुचारू रूप से जारी है. 3 अप्रैल से शुरू हुए इस तौल केंद्र पर क्षेत्र के किसान उत्साह के साथ अपनी उपज लेकर पहुंच रहे हैं. विभाग द्वारा पारदर्शी व्यवस्था के बीच अफीम की गुणवत्ता की जांच कर तौल की प्रक्रिया पूरी की जा रही है.
तौल का वर्तमान स्टेटस और लक्ष्य
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, इस तौल केंद्र पर अब तक कुल 1873 काश्तकारों ने अपनी अफीम का तौल करवा दिया है. गौरतलब है कि छोटी सादड़ी क्षेत्र में लगभग 4100 काश्तकार अफीम की खेती से जुड़े हुए हैं. वर्तमान में चल रहा ‘लुवाई-चुवाई’ (गम पद्धति) वाला तौल आगामी 15 अप्रैल तक समाप्त होने की संभावना है. इसके ठीक बाद, 17 अप्रैल से उन किसानों का तौल शुरू किया जाएगा जिन्होंने CPS (सीपीएस) पद्धति के तहत अफीम की खेती की है.
भ्रांतियों पर विराम: जिला अफीम अधिकारी का बयान
अफीम की गुणवत्ता की परख और जांच प्रक्रिया को लेकर पिछले कुछ दिनों से काश्तकारों के बीच कुछ भ्रांतियां फैल रही थीं। इन अफवाहों पर विराम लगाते हुए जिला अफीम अधिकारी आशीष भटनागर ने स्थिति स्पष्ट की.
आशीष भटनागर (जिला अफीम अधिकारी): “अफीम तौल की प्रक्रिया पूरी तरह से वैज्ञानिक और पारदर्शी है. गुणवत्ता की परख आधुनिक मानकों के आधार पर की जा रही है. काश्तकारों को किसी भी तरह की भ्रांति या अफवाह में आने की आवश्यकता नहीं है. विभाग किसानों की सहायता के लिए तत्पर है और सुनिश्चित किया जा रहा है कि हर पात्र किसान का माल नियमानुसार तुलवाया जाए.
किसानों में उत्साह और सुरक्षा व्यवस्था
तौल केंद्र पर किसानों की सुविधा के लिए छाया और पानी के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. साथ ही, अफीम जैसी कीमती उपज की सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन और विभागीय सुरक्षाकर्मी तैनात हैं. काश्तकारों को सलाह दी गई है कि वे अपने निर्धारित समय पर ही केंद्र पर पहुंचें ताकि व्यवस्था बनी रहे.

