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प्रतापगढ़: जब जज बने शिक्षक; ‘स्कूल अवेयरनेस प्रोग्राम’ के जरिए बच्चों को सिखाए कानून के पाठ

प्रतापगढ़, 07 अप्रैल 2026 राजस्थान में स्कूली शिक्षा और कानूनी जागरूकता के समन्वय की एक अनूठी मिसाल मंगलवार को देखने को मिली. राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RALSA), जयपुर के निर्देशानुसार प्रदेशव्यापी विशेष अभियान के तहत प्रतापगढ़ जिले के विभिन्न विद्यालयों में न्यायिक अधिकारियों ने स्वयं कक्षाओं की कमान संभाली और विद्यार्थियों को कानून की बारीकियों से रूबरू कराया.

प्रदेशभर के 1400 स्कूलों में सीधा संवाद

इस विशेष जागरूकता अभियान के तहत राजस्थान के लगभग 1400 विद्यालयों में न्यायिक अधिकारियों ने बच्चों से सीधा संवाद किया. प्रतापगढ़ जिले में इस मुहिम का नेतृत्व जिला एवं सेशन न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष श्रीमती आशा कुमारी ने किया. उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए बताया कि एक जागरूक नागरिक बनने के लिए कानून की बुनियादी जानकारी होना अनिवार्य है.

वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों ने दी उपस्थिति

अभियान के दौरान जिले के प्रमुख न्यायिक केंद्रों पर सक्रियता देखी गई. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव व अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश केदारनाथ, पोक्सो (POCSO) न्यायालय के न्यायाधीश, छोटीसादड़ी के अपर सेशन न्यायाधीश, प्रतापगढ़ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, तथा धरियावद व छोटीसादड़ी के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सहित अन्य अधिकारियों ने विभिन्न स्कूलों में पहुंचकर बच्चों की कक्षाएं लीं.

साइबर अपराध और सुरक्षा पर विशेष जोर

न्यायिक अधिकारियों ने विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर वर्तमान समय की चुनौतियों के बारे में विस्तार से समझाया. कक्षा के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित विषयों पर चर्चा की गई:

  • साइबर अपराध व बुलिंग: इंटरनेट के बढ़ते प्रभाव के बीच सुरक्षित रहने के तरीके.
  • डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन फ्रॉड: ठगी के नए तरीकों से बचने के उपाय.
  • पोक्सो (POCSO) अधिनियम: बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा के लिए बने सख्त कानूनों की जानकारी.
  • सोशल मीडिया का सुरक्षित उपयोग: डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी निजता को बनाए रखने के टिप्स.

एक प्रेरणादायक पहल

अधिकारियों ने बच्चों को समझाया कि कानून केवल सजा देने के लिए नहीं, बल्कि समाज की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए है. स्कूल प्रशासन और विद्यार्थियों ने इस पहल का स्वागत किया है. शिक्षकों का मानना है कि जजों के मुख से कानून की जानकारी सुनकर बच्चों के मन में न्याय व्यवस्था के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ेगी.

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