झीलों की नगरी उदयपुर में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक अनूठा समन्वय देखने को मिला है. शहर में निर्माणाधीन बहुप्रतीक्षित एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट के आड़े आ रहे पेड़ों को काटने के बजाय, नगर निगम ने उन्हें सुरक्षित स्थान पर ‘ट्रांसलोकेट’ (पुनर्स्थापित) करने का सराहनीय निर्णय लिया है. उदियापोल सर्कल पर चल रहे इस विशेष अभियान की शहर भर में चर्चा हो रही है.
रातभर चला विशेष रेस्क्यू अभियान
एलिवेटेड रोड निर्माण के चलते उदियापोल चौराहे को हटाना आवश्यक हो गया था. यहाँ करीब 40 छोटे-बड़े पेड़ निर्माण कार्य में बाधा बन रहे थे. नगर निगम प्रशासन ने पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने के बजाय आधुनिक तकनीक का सहारा लिया. गुरुवार देर रात करीब 11 बजे विशेषज्ञों की मौजूदगी में पेड़ों को शिफ्ट करने का कार्य शुरू हुआ, जो अलसुबह तक अनवरत जारी रहा. सुरक्षा के लिहाज से उदियापोल मार्ग पर यातायात को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था.
एक-एक पेड़ की कीमत करीब एक लाख रुपए
ट्रांसलोकेशन की प्रक्रिया में मुख्य रूप से पाम प्रजाति के सुंदर और महंगे पेड़ शामिल हैं. जानकारों के अनुसार, इन पेड़ों की अनुमानित कीमत करीब एक लाख रुपए प्रति पेड़ तक है. ऐसे में इन्हें बचाना न केवल पर्यावरण के लिए जरूरी था, बल्कि नगर निगम के लिए यह एक महत्वपूर्ण आर्थिक संपत्ति को बचाने जैसा भी है.
मशीनों और विशेषज्ञों का सहारा
इस जटिल प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए जेसीबी, बड़ी क्रेन और ट्रकों का इस्तेमाल किया गया. सबसे पहले जेसीबी की मदद से चौराहे के ढांचे को हटाया गया, जिसके बाद विशेषज्ञों की देखरेख में पेड़ों की जड़ों को बिना नुकसान पहुँचाए क्रेन से बाहर निकाला गया. इन पेड़ों को ट्रकों में लादकर सुरक्षित रूप से नगर निगम परिसर में पहुँचाया गया, जहाँ उन्हें दोबारा रोपा जा रहा है.

