डूंगरपुर कोतवाली थाना क्षेत्र के माडवा-खापरड़ा गांव में घाटी तालाब में डूबने से हुई दो मासूम बच्चियों की मौत के बाद सोमवार को पूरे क्षेत्र का माहौल बेहद गमगीन रहा. सुबह जब गांव की दो बेटियों की अलग-अलग स्थानों से एक साथ अंतिम यात्रा निकली, तो हर आंख नम हो उठी. परिजनों की चीख-पुकार और मातम के बीच दोनों बच्चियों का अंतिम संस्कार किया गया. इस दुखद घड़ी में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और मासूमों को अश्रुपूर्ण विदाई दी.
अवैध मिट्टी खनन बना ‘मौत का कुआं’, ग्रामीणों में आक्रोश
इस दर्दनाक हादसे के बाद ग्रामीणों में प्रशासन और खनन माफियाओं के खिलाफ भारी आक्रोश है. ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही और अवैध मिट्टी खनन का खौफनाक परिणाम है.
तलाब की स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने कई गंभीर आरोप लगाए:
- जेसीबी से गहरी खुदाई: पिछले कुछ वर्षों में घाटी तालाब से बड़े पैमाने पर काली मिट्टी का अवैध दोहन किया गया है.माफिया तालाब सूखने पर जेसीबी मशीनों से कई फीट गहरी खुदाई करते हैं.
- ईंट भट्टों को सप्लाई: यहाँ से निकाली गई मिट्टी को अवैध रूप से आसपास के ईंट भट्टों तक पहुँचाया जाता है.
- पानी में छिपे जानलेवा गड्ढे: इस अंधाधुंध खुदाई के कारण तालाब के भीतर गहरे और खतरनाक गड्ढे बन गए हैं. बारिश के दिनों में जब तालाब भर जाता है, तो ऊपर से पानी सामान्य दिखता है, लेकिन अंदर मौत के गड्ढे छिपे रहते हैं.
पानी में उतरने वाले बच्चों को यह अंदाजा नहीं होता कि कहाँ जमीन समतल है और कहाँ कई फीट गहरा गड्ढा. अगर समय रहते इस अवैध खनन पर रोक लगाई जाती और इन गड्ढों को भरा जाता, तो आज हमारी दो बेटियां जिंदा होतीं.
दोषियों पर कार्रवाई की मांग
दो मासूमों की असमय मौत ने पूरे गांव को हिलाकर रख दिया है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि तालाबों में अवैध रूप से मिट्टी का दोहन करने वाले माफियाओं पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए.

