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डूंगरपुर: मेडिकल कॉलेज बिना नोटिस हटाए गए 100 आउटसोर्स नर्सिंग कर्मियों का फूटा गुस्सा, जिला अस्पताल पर प्रदर्शन

डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज से जुड़े जिला अस्पताल में उस समय माहौल गरमा गया जब आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से कार्यरत करीब 100 नर्स ग्रेड-II/जीएनएम कर्मियों ने अपनी सेवाएं अचानक समाप्त किए जाने के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया. गुस्साए कर्मचारियों ने जिला अस्पताल के मुख्य गेट पर इकट्ठा होकर कॉलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रक को ज्ञापन सौंपा और न्याय की गुहार लगाई.

बिना नोटिस सेवा समाप्ति से नाराज हैं कर्मचारी

प्रदर्शनकारी नर्सिंग कर्मियों का कहना है कि वे लंबे समय से मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में अपनी निष्ठावान सेवाएं दे रहे थे. प्रशासन ने उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना या लिखित नोटिस के अचानक नौकरी से हटा दिया. इस एकतरफा फैसले से सभी कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है.

100 से अधिक पद रिक्त, फिर भी अनुभवी बाहर?

कर्मचारियों ने अपनी मांग के समर्थन में नियमों का हवाला देते हुए बताया कि:

  • वर्तमान में अस्पताल में राजस्थान कॉन्ट्रैक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट रूल्स-2022 के तहत नए अभ्यर्थियों की जॉइनिंग प्रक्रिया चल रही है.
  • अस्पताल में कुल 242 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से अब तक केवल 138 अभ्यर्थियों ने ही जॉइन किया है.
  • इस हिसाब से 104 पद अभी भी खाली पड़े हैं.

प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि जब अस्पताल में लगभग 100 पद रिक्त हैं, और हटाए गए अनुभवी कर्मियों की संख्या भी करीब 100 है, तो उन्हें इन खाली पदों पर समायोजित (Adjust) क्यों नहीं किया जा रहा? रिक्त पदों के रहते हुए अनुभवी स्टाफ को हटाना पूरी तरह अव्यावहारिक और अन्यायपूर्ण है.

दो महीने से मानदेय नहीं, आर्थिक संकट में परिवार

नौकरी जाने के झटके के साथ-साथ इन कर्मचारियों को पिछले दो महीनों (मई 2026 और जून 2026) का मानदेय (Salary) भी नहीं मिला है. लगातार दो महीने से वेतन लंबित होने के कारण कर्मचारियों के परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है.

कर्मचारियों की प्रमुख मांगें:

  1. रिक्त पड़े पदों पर अनुभवी आउटसोर्स कर्मियों को समायोजित कर सेवा विस्तार दिया जाए.
  2. मई और जून 2026 का बकाया मानदेय तत्काल प्रभाव से जारी किया जाए.

कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ही सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया, तो वे अपने हक के लिए आंदोलन को और उग्र करने के लिए मजबूर होंगे.

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