प्रतापगढ़ धरियावद में एक सप्ताह पहले वन विभाग द्वारा की गई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का मामला अब पूरी तरह तूल पकड़ चुका है. गरीबों के आशियाने उजाड़ने के विरोध में आज बड़ी संख्या में ग्रामीण विधायक थावरचंद डामोर के नेतृत्व में सड़कों पर उतर आए. प्रदर्शनकारियों ने पहले उपखंड मुख्यालय पर उग्र प्रदर्शन किया और फिर धरियावद-उदयपुर मार्ग पर चक्काजाम कर दिया. प्रशासन से वार्ता विफल होने के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग के रेंज कार्यालय का घेराव करने कूच कर दिया.

खातेदारी की जमीन को वन भूमि बताकर ढहाए मकान
धरियावद विधायक थावरचंद डामोर ने बताया कि एक सप्ताह पहले वन विभाग के अधिकारियों ने जून बोरिया गांव में नाथ परिवारों के निर्माणाधीन मकानों को ध्वस्त कर दिया था. वन विभाग ने इसे वन भूमि पर अतिक्रमण बताया, जबकि मौके पर मौजूद पटवारी और तहसीलदार ने इसे चारागाह भूमि घोषित किया था. वहीं, पीड़ित परिवारों का दावा है कि यह उनकी खातेदारी की जमीन है. इस कार्रवाई के बाद से ही ग्रामीणों में गहरा आक्रोश था और प्रशासन को कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी.
अधिकारियों से वार्ता विफल, विधायक ने दी चेतावनी
समय बीतने के बाद भी दोषी वनकर्मियों पर कार्रवाई न होने से नाराज ग्रामीण आज उपखंड कार्यालय पहुंचे और जमकर नारेबाजी की. इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने उदयपुर रोड जाम कर दिया. सूचना मिलते ही उपखंड अधिकारी अश्विनी मालू और डीएसपी नानालाल सालवी भारी पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने समझाइश की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी वनकर्मियों को निलंबित करने की मांग पर अड़े रहे.
विधायक डामोर ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि वन विभाग केवल अपना रौब दिखाने के लिए गरीब-मजदूरों के आशियाने उजाड़ रहा है, इनकी मानवीय संवेदनाएं मर चुकी है. उन्होंने मांग की कि दोषी अधिकारियों को तुरंत निलंबित किया जाए, मामले की निष्पक्ष जांच हो और पीड़ित परिवारों को दोबारा मकान बनाकर दिए जाएं. मांगें पूरी न होने पर आंदोलन को और उग्र करने की चेतावनी दी गई है.

