उदयपुर वीएलटीडी जीपीएस, परमिट और फिटनेस से जुड़ी गंभीर समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर राजस्थान में चल रहा प्रदेशव्यापी चक्का जाम आंदोलन और तेज हो गया है. प्रदेश ट्रक एवं ट्रांसपोर्ट संघर्ष समिति के आह्वान पर जारी इस अनिश्चितकालीन आंदोलन को झीलों की नगरी उदयपुर में भी व्यापक समर्थन मिला. दी उदयपुर ट्रांसपोर्ट ऑर्गनाइजेशन के नेतृत्व में गुरुवार को ट्रांसपोर्ट नगर से आरटीओ (RTO) कार्यालय तक ट्रकों की एक विशाल रैली निकालकर सरकार को आर-पार की चेतावनी दी गई.
50 ट्रकों की रैली से गूंजा शहर, थम गए पहिए
संगठन के संरक्षक पुष्पराज मेहता के निर्देशन एवं अध्यक्ष नरेंद्र सिंह राणावत के नेतृत्व में आंदोलन को सफल बनाने के लिए उदयपुर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में सघन संपर्क अभियान चलाया गया. चक्का जाम के तहत आज हजारों ट्रकों की चाबियां एकत्रित कर परिवहन कार्य पूरी तरह ठप रखा गया. इसके बाद देशभक्ति गीतों के बीच लगभग 50 ट्रकों के विशाल काफिले के साथ आरटीओ कार्यालय तक रैली निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में ट्रक मालिक, ट्रांसपोर्ट व्यवसायी और चालक शामिल हुए.
नियम तोड़ने पर 5100 का दंड और ‘चूड़ियां-आटा’ भेजने का ऐलान
संघर्ष समिति ने आंदोलन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. प्रवक्ता कुँ. हेमेन्द्र सिंह दवाणा ने बताया कि आंदोलन के दौरान यदि कोई भी ट्रक मालिक, ट्रांसपोर्टर या औद्योगिक इकाई चोरी-छिपे माल का परिवहन करती है, तो संगठन द्वारा उस पर ₹5100 का संगठनात्मक दंड लगाया जाएगा. इतना ही नहीं, विरोध स्वरूप उसके प्रतिष्ठान पर चूड़ियां, आटा और सब्जी भेजी जाएगी तथा उसे ब्लैकलिस्ट कर वहां शांतिपूर्ण धरना दिया जाएगा.
अधिकारियों से वार्ता: परिवहन आयुक्त ने दिया एक सप्ताह का आश्वासन
रैली के बाद ट्रांसपोर्टर्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने आरटीओ और डीटीओ अधिकारियों के साथ विस्तृत वार्ता की. अधिकारियों ने माना कि फिटनेस सेंटर बंद रहने से वाहन स्वामियों पर भारी-भरकम चालान का बोझ बढ़ा है. वार्ता के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने परिवहन आयुक्त (कमिश्नर) से दूरभाष पर बात की. परिवहन आयुक्त ने आश्वस्त किया कि वीएलटीडी जीपीएस लगाने की प्रक्रिया तुरंत शुरू कराई जाएगी और लंबित फिटनेस व परमिट व्यवस्थाओं को इसी सप्ताह प्राथमिकता से चालू किया जाएगा। साथ ही, बंद अवधि के चालानों की समीक्षा कर राहत देने का भरोसा दिया गया.
लिखित आदेश तक जारी रहेगा आंदोलन
ठोस आश्वासन के बावजूद संघर्ष समिति ने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार लिखित रूप में कोई मजबूत निर्णय नहीं लेती, तब तक प्रदेशव्यापी चक्का जाम जारी रहेगा. समिति ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द मांगें पूरी नहीं हुईं, तो चरणबद्ध तरीके से आवश्यक सेवाओं के परिवहन को भी बंद कर दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी.

