डूंगरपुर शहर के महात्मा गांधी सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूल (भोईवाड़ा नंबर 7) की बदहाली की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सरकार के दावों और शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलती है. कभी 20 कमरों के विशाल परिसर में शान से चलने वाला यह विद्यालय आज शिक्षा विभाग की घोर लापरवाही के कारण महज 4 कमरों में सिमट कर रह गया है. यहाँ कक्षा नर्सरी से लेकर आठवीं तक के मासूम बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं.



अलमारियों की ओट में चल रही हैं कक्षाएं, बरामदे में लगाए कांटे

करीब दस वर्ष पहले इस स्कूल में बच्चों की पढ़ाई के लिए 20 से अधिक कमरे उपलब्ध थे. लेकिन समय के साथ रख-रखाव और मरम्मत के अभाव में स्कूल का यह सरकारी भवन लगातार जर्जर होता चला गया. पिछले वर्ष 2025 में प्रशासन द्वारा स्कूल के कई कमरों और बरामदों को ‘जर्जर व असुरक्षित’ घोषित कर दिया गया, जिसके बाद स्कूल का दायरा सिमटकर सिर्फ 4 कमरों का रह गया.
वर्तमान में इन चार कमरों में ही अलमारियों का अस्थाई पार्टीशन (बंटवारा) बनाकर नर्सरी से आठवीं तक के बच्चों को बिठाया जा रहा है और इसी में स्कूल का ऑफिस भी संचालित है. हादसे के डर से प्रशासन ने जर्जर बरामदे के आगे कटीली झाड़ियाँ और कांटे लगा दिए हैं ताकि बच्चे वहां न जाएं, लेकिन जर्जर छत के नीचे बैठना हर वक्त एक बड़े खतरे को दावत दे रहा है.
कई बार गुहार, पर कुंभकर्णी नींद में सोया रहा विभाग
स्कूल के प्रधानाचार्य हरीश गामोट और छात्राओं सोनल व प्रियांशी के अनुसार, स्कूल प्रशासन ने भवन की इस जानलेवा हालत को सुधारने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कई बार शिक्षा विभाग को लिखित सूचनाएं और पत्र भेजे हैं. स्कूल प्रबंधन ने अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर भी वास्तविक स्थिति से अवगत कराया, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते अब तक न तो नए भवन की स्वीकृति मिली है और न ही मरम्मत का काम शुरू हो सका है.
एक तरफ सरकार ‘अंग्रेजी माध्यम शिक्षा’ का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं जिला मुख्यालय पर ही नौनिहालों का भविष्य अंधकारमय और असुरक्षित बना हुआ है. समय रहते यदि ध्यान नहीं दिया गया, तो यहाँ कभी भी कोई बड़ा हादसा घटित हो सकता है.

