उदयपुर यूडीए (UDA) पेराफेरी क्षेत्र की पंचायतों और नगर निगम परिसीमन में शामिल गांवों में आबादी भूमि का हस्तांतरण न होने से ग्रामीण और जनप्रतिनिधियों का गुस्सा चरम पर है. ‘पेराफेरी जिला संघर्ष समिति’ ने प्रशासनिक ढिलाई के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जिला प्रशासन को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है. समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तय सीमा में लंबित फाइलों का निस्तारण नहीं हुआ, तो क्षेत्र की सभी आठों तहसीलों पर ताले ठोककर उग्र प्रदर्शन किया जाएगा.

प्रशासनिक लेटा-लतीफी से ठप पड़े पट्टा वितरण कार्य
संघर्ष समिति के संयोजक चंदन सिंह देवड़ा ने बैठक के दौरान बताया कि सरकार द्वारा लगाए जा रहे राहत शिविरों में भी अधिकारियों की उपेक्षा के कारण पट्टे जारी नहीं हो पा रहे हैं.
- 4 जनवरी 2022 का आदेश: सरकार ने पेराफेरी के गांवों में आबादी से सटी भूमि को संबंधित पंचायतों को देने के स्पष्ट निर्देश दिए थे.
- 17 अप्रैल 2025 का आदेश: निगम क्षेत्र में शामिल गांवों की राजकीय व आबादी भूमि को निगम के नाम दर्ज करने का आदेश जारी हुआ था.
कलेक्टर द्वारा तहसीलदारों को लिखित निर्देश दिए जाने के बावजूद, तहसील व उपखंड स्तर पर आदेशों की पालना ठप पड़ी है. कलेक्टर कार्यालय में भेजे गए 32 प्रस्तावों का निस्तारण न होने से फाइलों की लोटाफेरी जारी है.
205 गांवों के लोगों का उग्र आंदोलन का रुख
पेराफेरी के सभी 205 गांवों, सर्व समाज और घुमंतू-अर्द्ध घुमंतू वर्ग के लोगों का आह्वान किया गया है कि वे आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार रहें. मावली, वल्लभनगर, बारापाल, घासा, गोगुंदा और निगम में शामिल गिर्वा, बड़गांव व कुराबड़ के गांवों में भारी रोष व्याप्त है.
संघर्ष समिति ने चेताया है कि यदि भूमि हस्तांतरण जल्द नहीं हुआ तो तहसीलों पर तालाबंदी के बाद कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी.

