उदयपुर की मशहूर फतहसागर झील पर शुक्रवार देर रात एक खौफनाक हादसा होने से टल गया. मानसिक तनाव और डिप्रेशन से जूझ रही एक युवती ने जान देने की नियत से झील में छलांग लगा दी. हालांकि, मौके पर मौजूद नागरिकों की मुस्तैदी और बहादुरी के चलते महज 30 सेकेंड के भीतर युवती को सुरक्षित पानी से बाहर निकाल लिया गया.
यह पूरी घटना शुक्रवार देर रात सर्किट हाउस गेट के पास स्थित नेहरू गार्डन की पुरानी जेटी की है. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवती घर से सुसाइड नोट लिखकर आई थी और कुछ देर तक झील किनारे अकेली खड़ी रही. इसके बाद उसने अचानक गहरे पानी में छलांग लगा दी. युवती के पानी में गिरते ही किनारे मौजूद एक महिला ने शोर मचाकर मदद की गुहार लगाई.
महिला की आवाज सुनते ही पास ही खड़े सैटेलाइट हॉस्पिटल के डिप्टी कंट्रोलर डॉ. नरेंद्र सिंह देवल और उनके दोस्त वकील दीनबंधु आसिया तुरंत हरकत में आए. बिना एक पल गंवाए दीनबंधु आसिया ने फतहसागर के गहरे पानी में छलांग लगा दी.
पानी के भीतर युवती मानसिक तनाव के कारण बाहर आने का विरोध कर रही थी और जान देने पर अड़ी हुई थी. इसके बावजूद दीनबंधु ने हिम्मत नहीं हारी और उसे कमर से कसकर पकड़ते हुए किनारे की तरफ खींचना शुरू किया. इसी बीच उनके साथी मोहम्मद अजहर भी मदद के लिए पानी में उतर गए. किनारे पर मौजूद अन्य लोगों की मदद से रस्सी फेंककर युवती को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.
घटना के बाद डॉ. नरेंद्र सिंह देवल ने युवती को तुरंत प्राथमिक उपचार दिया. डॉ. देवल ने बताया कि यदि पानी में कूदने में कुछ सेकेंड्स की भी देरी हो जाती, तो बड़ा हादसा हो सकता था.
सूचना मिलने पर अंबामाता थाना पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने युवती की काउंसलिंग की और उसे सुरक्षित अपने साथ थाने ले गई, जहां उसके परिजनों को सूचित किया गया. जाबांजों की इस बहादुरी की पूरे शहर में सराहना हो रही है.

