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अमित शाह का सांसद राजकुमार रोत पर तीखा प्रहार, बोले- ‘हथियार उठाते तो सरेंडर की लिस्ट में होते

संसद के बजट सत्र के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने डूंगरपुर-बांसवाड़ा के सांसद और भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के नेता राजकुमार रोत पर अब तक का सबसे बड़ा जुबानी हमला बोला है. शाह ने दो-टूक शब्दों में कहा कि देश में संविधान और कानून का राज है, इसी वजह से आज राजकुमार रोत संसद में बैठकर अपनी बात रख रहे हैं.

संविधान की ताकत से पहुंचे संसद: शाह

लोकसभा में बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि अगर राजकुमार रोत ने लोकतांत्रिक रास्ते के बजाय हथियार उठाने वालों का रास्ता चुना होता, तो आज वे सांसद नहीं होते बल्कि सुरक्षाबलों के सामने सरेंडर करने वालों की लिस्ट में शामिल होते. उन्होंने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार में हिंसा का रास्ता चुनने वालों के साथ सख्ती से निपटा जाएगा. शाह ने कहा, “जो हथियार उठाएगा, उसे हिसाब चुकाना पड़ेगा. हमारे संविधान ने अन्याय के खिलाफ लड़ने का एक स्पष्ट और लोकतांत्रिक रास्ता दिया है, जिस पर चलकर रोत आज यहां बैठे हैं.

कांग्रेस और BAP की विचारधारा पर उठाए सवाल

गृह मंत्री ने आदिवासियों के पिछड़ेपन के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि 60 साल के शासन में कांग्रेस ने आदिवासियों को विकास से दूर रखा. उन्होंने राजकुमार रोत को आड़े हाथों लेते हुए सवाल किया कि वे सिर्फ वोट बैंक के लिए ऐसी विचारधारा का समर्थन क्यों कर रहे हैं जिसने दशकों तक आदिवासियों के बैंकों में खाते तक नहीं खुलने दिए. शाह ने जोर देकर कहा कि आदिवासियों को पक्का घर, बिजली, पानी और मोबाइल टावर देने का काम अब जाकर केंद्र की मोदी सरकार कर रही है.

‘नक्सली मूवमेंट के वकील न बनें’

अमित शाह ने सदन में कहा कि जो लोग ‘हथियारी मूवमेंट’ के वकील बन रहे हैं, उन्हें यह तय करना होगा कि वे संविधान को मानेंगे या नहीं. उन्होंने कहा कि देश में अदालतों से लेकर पंचायत तक की व्यवस्था है, ऐसे में व्यवस्था को नकार कर हथियार उठाना किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है.

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