राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत एसीबी (ACB) ने एक और बड़ी कार्यवाही को अंजाम दिया है. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की स्पेशल यूनिट, उदयपुर ने सोमवार को तहसील कार्यालय वल्लभनगर के भू-अभिलेख निरीक्षक (RI) देवेंद्र सिंह राणावत को 15,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है. इस मामले में वल्लभनगर तहसीलदार की भूमिका भी जांच के दायरे में है.
क्या है पूरा मामला?
एसीबी के महानिदेशक पुलिस श्री गोविंद गुप्ता के अनुसार, परिवादी की राजस्व ग्राम राणाकुई (पटवार हल्का गोटिपा) में करीब पांच बीघा कृषि भूमि स्थित है. रिकॉर्ड के सेग्रिगेशन (बंटवारे) की प्रक्रिया के दौरान तकनीकी त्रुटि के कारण भूमि की किस्म ‘बारानी तृतीय’ के स्थान पर ‘भवन’ दर्ज हो गई थी. इस गलती को सुधारने के लिए परिवादी ने तहसीलदार वल्लभनगर के समक्ष प्रार्थना पत्र पेश किया था.
रिकॉर्ड शुद्धिकरण के इस कार्य के बदले में भू-अभिलेख निरीक्षक देवेंद्र सिंह राणावत ने परिवादी से 15,000 रुपये की रिश्वत की मांग की थी. आरोपी ने भरोसा दिलाया था कि वह तहसीलदार से आदेश करवाकर अपनी आरपीजी आईडी (RPG ID) के माध्यम से इसे ऑनलाइन अपडेट कर देगा.
एसीबी का जाल और गिरफ्तारी
शिकायत मिलने पर एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री राजीव जोशी और पुलिस निरीक्षक लक्ष्मणलाल डांगी के नेतृत्व में टीम ने 13 और 23 फरवरी को रिश्वत की मांग का सत्यापन करवाया। सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हुई.
सोमवार, 30 मार्च को योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्यवाही करते हुए एसीबी की टीम ने जैसे ही आरोपी देवेंद्र सिंह को परिवादी से 15,000 रुपये की रिश्वत राशि लेते पकड़ा, मौके पर ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया.
तहसीलदार की भूमिका संदिग्ध
कार्यवाही के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि आरोपी आरआई ने रिश्वत की मांग करते समय “साहब” (तहसीलदार वल्लभनगर) के नाम का हवाला दिया था. एसीबी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि इस प्रकरण में तहसीलदार वल्लभनगर की भूमिका भी संदिग्ध है और उनकी संलिप्तता की गहन जांच की जा रही है. फिलहाल एसीबी की टीम आरोपी से पूछताछ कर रही है और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है.

