
बांसवाड़ा जिले में शुक्रवार को डीएनटी समाज, वंचित ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के हितों को लेकर भारी जन-आक्रोश देखने को मिला. राष्ट्रीय पशुपालक संघ, डीएनटी संघर्ष समिति एवं मूल ओबीसी महापंचायत के संयुक्त तत्वाधान में जिले में विशाल ‘जेल भरो आंदोलन’ का आयोजन किया गया. झुलसाने वाली 46 डिग्री की भीषण गर्मी में भी हजारों आंदोलनकारी सड़कों पर उतरे और रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे। इस दौरान प्रदर्शनकारी ऊंट पर बैठकर अनोखे अंदाज में ज्ञापन देने पहुंचे, जिसने सबका ध्यान खींचा.
कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन और 11 सूत्री मांगें

आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट के बाहर मुख्यमंत्री का पुतला फूंका और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को 11 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा। डीएनटी संघर्ष समिति के अध्यक्ष लालजी राईका ने कहा कि हमारी प्रमुख मांग डीएनटी समाज को अलग से 10% आरक्षण देने की है, जिसकी सिफारिश पूर्व में रेनके और ईदाते आयोग भी कर चुके हैं। प्रदेश में इस वर्ग की आबादी करीब 15% (1.23 करोड़) है, लेकिन इन्हें इनका हक नहीं मिल रहा है। इसके अलावा समाज ने 10% राजनीतिक भागीदारी, आवास के पट्टे, जमीन और शिक्षा की पुरजोर मांग की है।
सरकार के सामने रखीं 3 शर्तें, 1 जुलाई को जयपुर में महा-पड़ाव की चेतावनी
संघर्ष समिति के सह-अध्यक्ष रतन नाथ कालबेलिया ने सरकार पर वादाखिलाफी और दमनकारी नीति का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि पूर्व में आंदोलनकारियों पर झूठे मुकदमे दर्ज किए गए, जिसके विरोध में अब पूरा वंचित समाज खुद जेल जाने को तैयार है. आंदोलनकारी नेताओं ने सरकार के सामने तीन मुख्य शर्तें रखी हैं—वार्ता सीधे सीएम स्तर पर हो, समाधान का रोडमैप बताया जाए और वार्ता का समय तुरंत तय हो. नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो आगामी 1 जुलाई को राजधानी जयपुर में ऐतिहासिक महा-पड़ाव डाला जाएगा. इस आंदोलन में डूंगरपुर, मेवाड़ और अन्य क्षेत्रों से आए गाड़िया लुहार, कालबेलिया, रेबारी, बनजारा और नट समाज सहित हजारों लोग मौजूद रहे.

