बांसवाड़ा जिले के पाटन थाना क्षेत्र में मौताणे की मांग को लेकर शव का अपमान करने, पुलिस टीम को धमकी देने और राजकार्य में बाधा पहुंचाने का एक गंभीर मामला सामने आया है. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 16 नामजद सहित कुल 36 आरोपियों के खिलाफ नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) और ‘राजस्थान मृत शरीर का सम्मान अधिनियम 2023’ के तहत केस दर्ज किया है.
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, राजापुरा निवासी पारसिंग अपने भतीजे की पत्नी को लेने ससुराल सातलिया गया था. वहां किसी बात पर हुई अनबन के बाद उसने कीटनाशक पी लिया, जिससे इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. 1 जुलाई को जब पुलिस पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंपने पहुंची, तो परिजनों और रिश्तेदारों ने दाह संस्कार करने से मना कर दिया.
ससुराल के बाहर शव रख मांगे 15 लाख
आक्रोशित परिजन शव को लेकर मृतक के ससुर नाथू आमलिया (निवासी सातलिया) के घर पहुंच गए. वहां उन्होंने शव को घर के बाहर रख दिया और 15 लाख रुपये मौताणे (मुआवजे) की मांग करने लगे. मौके पर तैनात पुलिस जाब्ते ने जब उन्हें समझाने का प्रयास किया, तो आरोपियों ने पुलिस को ही धमकी दे डाली कि “हमें 15 लाख रुपये दिलाओ, नहीं तो लाश को यहीं जला देंगे.”
देर रात पुलिस ने शव को कराया सुरक्षित
मामले की गंभीरता को देखते हुए पाटन थानाधिकारी सुरजमल खराडी अतिरिक्त जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचे. देर रात तक समझाइश के बाद भी जब परिजन नहीं माने और शव को वहीं छोड़कर अपने गांव चले गए, तब पुलिस ने संक्रमण फैलने से रोकने और मृत शरीर के सम्मान हेतु शव को जब्त किया. पुलिस ने सरकारी वाहन से शव को महात्मा गांधी अस्पताल (MGH) बांसवाड़ा की मोर्चरी में सुरक्षित रखवाया. इसके अगले दिन आरोपियों ने 50 हजार रुपये की फर्जी लिखावट तैयार कर थाना प्रभारी पर 5 दिन में 15 लाख दिलाने का दबाव भी बनाया.
इन लोगों पर दर्ज हुआ मुकदमा
पुलिस ने शव का अपमान करने और राजकार्य में बाधा डालने के आरोप में धूलजी डामोर, भावचंद चारेल, भूरा डामोर, परवेश चारेल, भारत डामोर, भेरू वसुनिया, अंजू डामोर, राजू डामोर, दीवान, भोलू, सवजी, दशरथ, मेगु, सुभाष, रेजु और सोहन चारेल सहित 16 नामजद और 20 अन्य ग्रामीणों के खिलाफ सख्त धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

