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छात्रवृत्ति योजना पर सांसद राजकुमार रोत ने उठाया सवाल, करोड़ों की राशि जारी फिर भी समय पर भुगतान और पारदर्शिता की कमी

अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के विद्यार्थियों के लिए चलाई जा रही पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में पारदर्शिता और समय पर भुगतान को लेकर बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत ने लोकसभा में सरकार को घेरा. सांसद के सवाल पर केंद्र सरकार ने विस्तृत आंकड़े पेश किए हैं, जो योजना के व्यापक दायरे को तो दर्शाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर मौजूद खामियों को भी उजागर करते हैं.

हजारों करोड़ का बजट, लाखों लाभार्थी

सरकार द्वारा सदन में दिए गए जवाब के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में छात्रवृत्ति के मद में भारी बढ़ोतरी हुई है.

  • अनुसूचित जाति वर्ग: वर्ष 2024-25 में 5562 करोड़ रुपये जारी किए गए, जिससे करीब 48 लाख छात्र लाभान्वित हुए.
  • अनुसूचित जनजाति वर्ग: वर्ष 2024-25 में 2598 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई, जिससे देश भर के लाखों छात्रों को शिक्षा में संबल मिला.

राजस्थान में छात्रवृत्ति की स्थिति

राजस्थान के संदर्भ में बात करें तो अनुसूचित जाति वर्ग के लिए वर्ष 2024-25 में लगभग 180 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई, जिससे प्रदेश के 2.29 लाख विद्यार्थियों को लाभ पहुँचा. इसी तरह एसटी वर्ग के भी हजारों छात्रों को इस योजना से जोड़ा गया है. राजस्थान के अलावा गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी लाभार्थियों की संख्या काफी अधिक रही है.

सांसद ने उठाए ‘पारदर्शिता’ और ‘देरी’ पर सवाल

सांसद राजकुमार रोत ने आंकड़ों पर संतोष जताने के साथ ही प्रक्रियागत खामियों पर गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि:

  1. सरकार करोड़ों रुपये जारी करने का दावा कर रही है, लेकिन हकीकत में छात्रों को महीनों तक छात्रवृत्ति का इंतजार करना पड़ता है.
  2. छात्रों को अपनी एप्लीकेशन की स्थिति (Status) और भुगतान की समय-सीमा की स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाती.
  3. उन्होंने मांग की है कि भुगतान की निगरानी व्यवस्था और पारदर्शिता को और अधिक मजबूत किया जाए ताकि गरीब छात्र अपनी पढ़ाई बिना किसी आर्थिक बाधा के जारी रख सकें.

सरकार का पक्ष: DBT से हो रहा भुगतान

सरकार ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि सभी छात्रवृत्तियों का भुगतान ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) के माध्यम से सीधे बैंक खातों में किया जा रहा है. पूरी प्रक्रिया राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) के जरिए संचालित होती है. सरकार ने माना कि राज्यों के साथ समन्वय और समीक्षा बैठकों के बावजूद जमीनी स्तर पर कुछ देरी की शिकायतें आती हैं, जिन्हें सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं.

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