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डूंगरपुर: खाद के लिए आधार जरूरी, शराब के लिए क्यों नहीं?, सीएलजी बैठक में उठा अनोखा सवाल

डूंगरपुर जिले के धंबोला थाना परिसर में आयोजित सीएलजी (कम्युनिटी लाइजनिंग ग्रुप), पुलिस मित्र और ग्राम रक्षक दल की बैठक में एक बेहद अनोखा और गंभीर मुद्दा सामने आया. बैठक में एक सदस्य ने सवाल उठाया कि जब किसानों को खाद खरीदने के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता का सामना करना पड़ता है, तो शराब की बिक्री पर नियंत्रण रखने के लिए इसे जरूरी क्यों नहीं किया जाना चाहिए?

बैठक में उठे क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे

थाना परिसर में जिला पुलिस अधीक्षक (SP) मनीष कुमार की मौजूदगी में आयोजित इस बैठक में स्थानीय लोगों ने क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं और सुझावों को सामने रखा:

  • शराब की बिक्री पर नियंत्रण: भादर निवासी ज्योतिलाल बुझ ने सुझाव दिया कि शराब की अवैध बिक्री और अत्यधिक उपभोग को रोकने के लिए इसे खरीदते समय भी आधार अनिवार्य किया जाए.
  • यातायात और अतिक्रमण: सीमलवाड़ा क्षेत्र में बढ़ते अतिक्रमण को हटाने और ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की गई.
  • पुलिस बुनियादी ढांचा: पीठ चौकी में स्टाफ बढ़ाने, नए चौकी भवन के निर्माण और बंद पड़े सीसीटीवी कैमरों को फिर से चालू करने का मुद्दा उठाया गया.
  • अवैध गतिविधियां: क्षेत्र में अवैध शराब और मांस की दुकानों पर सख्त कार्रवाई के साथ-साथ डीजे के शोर पर नियंत्रण की मांग की गई.

पुलिस की कार्यशैली पर पक्ष-विपक्ष का मिला समर्थन

बैठक के दौरान एक सकारात्मक माहौल देखने को मिला, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने पुलिस प्रशासन की सराहना की. कांग्रेस और भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के कार्यकर्ताओं ने एसपी मनीष कुमार के कार्यकाल में जिले की सुधरती कानून व्यवस्था और अपराधों पर प्रभावी अंकुश की तारीफ की.

वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रकाश पंड्या ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में भयमुक्त वातावरण स्थापित हुआ है और पुलिस को अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की खुली छूट मिली है.

एसपी मनीष कुमार के कड़े निर्देश

एसपी मनीष कुमार ने बॉर्डर क्षेत्र (सरथूना चौकी) पर विशेष सतर्कता बरतने और अवैध गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले में अपराधों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जा रही है.

सुरक्षा की अपील: एसपी ने बताया कि बीते वर्ष जिले में कई लोगों ने सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाई, जिनमें से अधिकांश को हेलमेट पहनकर बचाया जा सकता था. उन्होंने आमजन से हेलमेट लगाने और पुलिस का सहयोग करने की अपील की.

बैठक के बाद अधिकारियों को रात्रि गश्त को और अधिक प्रभावी बनाने के साथ-साथ लंबित मामलों के जल्द निस्तारण के निर्देश दिए गए.

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