डूंगरपुर जिले के श्री हरदेव जोशी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉक्टरों ने एक बार फिर अपनी कार्यकुशलता का परिचय देते हुए एक प्रसूता को नई जिंदगी दी है. डॉक्टरों की टीम ने समय रहते एक अत्यंत जटिल ऑपरेशन कर न केवल प्रसूता की जान बचाई, बल्कि जिले की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती को भी साबित किया है.
डिलीवरी के बाद बिगड़ी थी हालत
जानकारी के अनुसार, रोहनवाड़ा निवासी निरमा डामोर (पत्नी जितेंद्र) को प्रसव के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र छानी ले जाया गया था. डिलीवरी के बाद महिला को अचानक अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा. हालत गंभीर होते देख स्थानीय डॉक्टरों ने उसे प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया.
बच्चेदानी फटने से बढ़ा था खतरा
अस्पताल पहुंचने पर जब डॉक्टरों ने गहन जांच की, तो पता चला कि महिला की बच्चेदानी फट चुकी थी. यह एक बेहद जानलेवा स्थिति होती है, जिसमें जरा सी भी देरी मरीज की जान ले सकती थी. मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने मामले की गंभीरता को समझते हुए बिना समय गंवाए तत्काल आपातकालीन ऑपरेशन का निर्णय लिया.
2 घंटे चला ऑपरेशन, चढ़ाया 6 यूनिट ब्लड
करीब 2 घंटे तक चले इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन में डॉक्टरों को सफलता मिली. अत्यधिक खून बह जाने के कारण महिला के शरीर में रक्त की भारी कमी हो गई थी, जिसे पूरा करने के लिए ऑपरेशन के दौरान और बाद में कुल 6 यूनिट ब्लड चढ़ाया गया. डॉक्टरों के समन्वित प्रयासों से महिला की स्थिति को स्थिर किया जा सका.
इन जांबाज डॉक्टरों की टीम ने दी नई जिंदगी
इस सफल ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम में विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र कलाल, डॉ. गुणवती मीणा, डॉ. सतीश श्रीमाली, डॉ. आशीष, डॉ. सुनील, डॉ. नीतू मौर्य और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. अमित जैन शामिल थे. साथ ही नर्सिंग ऑफिसर राकेश शर्मा ने भी टीम के साथ महत्वपूर्ण सहयोग दिया.
समय पर उपचार बना जीवनदान
डॉक्टरों के अनुसार, पीएचसी स्तर से समय पर मरीज को रेफर किया जाना और जिला अस्पताल में त्वरित उपचार मिलना ही इस सफलता का मुख्य कारण रहा. फिलहाल महिला की हालत पूरी तरह स्थिर है और उसे स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है.

