डूंगरपुर संसद में भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के संस्थापक और सांसद राजकुमार रोत के खिलाफ की गई कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर आदिवासी समाज में उबाल है. सोमवार को डूंगरपुर में बीएपी कार्यकर्ताओं ने जिला अध्यक्ष अनुतोष रोत के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया. कार्यकर्ताओं ने गृह मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर उनके इस्तीफे की मांग की.
क्या है विवाद की जड़?
बीएपी नेताओं का आरोप है कि संसद में चर्चा के दौरान जब सांसद राजकुमार रोत नक्सलवाद और आदिवासियों के हक की बात रख रहे थे, तब गृह मंत्री अमित शाह ने उनके लिए कथित तौर पर अपमानजनक और अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया. पार्टी का कहना है कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को ‘नक्सलवाद’ से जोड़ना न केवल सांसद का अपमान है, बल्कि यह पूरे देश के आदिवासी समुदाय की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य है.
‘जल-जंगल-जमीन की आवाज दबाने की कोशिश’
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि सांसद राजकुमार रोत सदन में संविधान की 5वीं और 6वीं अनुसूची को लागू करने तथा आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं. उनकी आवाज को दबाने के लिए ‘नक्सलवाद का ठप्पा’ लगाया जा रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. बीएपी ने इस बयान को ‘धमकी भरा’ और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ करार दिया है.
गृह मंत्री से माफी और इस्तीफे की मांग
प्रदर्शन के बाद जिला कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में बीएपी ने मुख्य रूप से दो मांगें रखी हैं:
- गृह मंत्री अमित शाह नैतिक आधार पर अपने पद से तुरंत इस्तीफा दें.
- गृह मंत्री पूरे सदन और देश के सामने सांसद राजकुमार रोत व समस्त आदिवासी समाज से लिखित या सार्वजनिक माफी मांगें.
देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
बीएपी जिला अध्यक्ष अनुतोष रोत ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार ने इस मामले में जल्द उचित कार्रवाई नहीं की और माफी नहीं मांगी गई, तो आने वाले समय में केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश में उग्र आंदोलन किया जाएगा. इस विरोध प्रदर्शन में जिले भर से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे.

