डूंगरपुर जिले में वन विभाग द्वारा हाल ही में आयोजित की गई वार्षिक वन्यजीव गणना के परिणाम सामने आ गए हैं. इस वर्ष की गणना में वन्यजीव प्रेमियों के लिए उत्साहजनक खबर यह है कि जिले में लेपर्ड (तेंदुआ) और लोमड़ी की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. हालांकि, राष्ट्रीय पक्षी मोर सहित कुछ अन्य प्रजातियों की संख्या पिछले साल के मुकाबले कम नजर आई है.

42 वॉटर हॉल्स पर हुई गणना
उपवन संरक्षक चन्द्रपाल सिंह ने बताया कि इस बार बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर 1 से 2 मई तक जिले के 42 चिन्हित वॉटर हॉल्स (पानी के स्रोतों) पर गणना की गई. इस 24 घंटे चलने वाली प्रक्रिया में 110 वनकर्मियों ने अपनी सेवाएं दीं. गणना के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष कुल 8019 वन्यजीव देखे गए हैं, जो कि वर्ष 2025 की तुलना में करीब 1500 कम हैं.
लेपर्ड की संख्या में उछाल
वन विभाग के लिए सबसे सुखद पहलू लेपर्ड की संख्या में वृद्धि है। पिछले साल की तुलना में इस बार 15 अधिक लेपर्ड देखे गए हैं, जिससे जिले में कुल लेपर्ड की संख्या बढ़कर 36 हो गई है. लेपर्ड के साथ-साथ लोमड़ी (71), मगरमच्छ, छोटा बिज्जू, नीलगाय, जंगली सूअर और सेही की संख्या में भी इजाफा हुआ है.
मोर और लंगूरों की संख्या घटी, बारिश रही मुख्य कारण
आंकड़ों के मुताबिक, सियार, जरख, जंगली बिल्ली, लंगूर और मोरों की संख्या में इस बार कमी देखी गई है. पक्षियों और कुछ जानवरों की संख्या कम दिखने के पीछे वन विभाग ने एक रोचक कारण बताया है. उपवन संरक्षक के अनुसार, पिछले वर्ष हुई अच्छी बारिश की वजह से जंगलों में प्राकृतिक जल स्रोतों पर पर्याप्त पानी उपलब्ध है. ऐसे में वन्यजीवों को मुख्य वाटरहोल्स (जहां गणना की जा रही थी) पर आने की आवश्यकता नहीं पड़ी, जिससे उनकी दृश्यता कम रही.
जिले में इस बार कोई नई प्रजाति का वन्यजीव देखने को नहीं मिला है. विभाग अब इन आंकड़ों के आधार पर वन्यजीव संरक्षण की अगली रणनीति तैयार कर रहा है.

