प्रतापगढ़ राजस्थान के राजस्व मंत्री हेमंत मीणा के अपने ही विधानसभा क्षेत्र में विकास के बड़े-बड़े दावे खोखले साबित हो रहे हैं. जिले के अंतिम छोर पर बसे नानणा-कंथार गांव को मंदसौर-प्रतापगढ़ मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली 3 किलोमीटर लंबी सड़क मानसून की पहली ही बारिश में पूरी तरह दलदल में तब्दील हो गई है. सड़क की बदहाली को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा अब सोशल मीडिया पर फूट पड़ा है.

सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा: ‘वोट सिर्फ लेने आते हैं’
स्थानीय व्हाट्सएप और सोशल मीडिया ग्रुपों में ग्रामीण खुलकर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि विधानसभा चुनाव में इस गांव से 95% वोटिंग बीजेपी के पक्ष में हुई थी, और खुद क्षेत्र के विधायक सूबे में कैबिनेट मंत्री हैं. इसके बावजूद गांव के हालात बदतर हैं. लोगों ने कमेंट कर लिखा, “नेता सिर्फ वोट लेने आते हैं, काम के वक्त कोई नहीं दिखता. नानणा-कंथार एक अभागा गांव बन चुका है, जिसकी तरफ प्रशासन और जनप्रतिनिधि कोई नहीं देखता.
5 साल से सिर्फ आश्वासन, स्कूली बच्चे और मरीज बेहाल
ग्रामीण श्रीपाल सिंह, अवल खान, कुलदीप सिंह और शहीद खान ने बताया कि वे सड़क निर्माण के लिए पिछले 5 साल से विधायक से लेकर कलेक्टर तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन फाइल कागजों से आगे नहीं बढ़ी. पहली बारिश के बाद 3 किलोमीटर का यह रास्ता जानलेवा बन चुका है. एम्बुलेंस का गांव में आना नामुमकिन हो गया है. दुपहिया वाहन चालक आए दिन फिसलकर चोटिल हो रहे हैं, और स्कूली बच्चे कीचड़ में गिरने को मजबूर हैं. इसके अलावा दूध, सब्जी और कृषि उपज मंडी तक नहीं पहुंचने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है.
ग्रामीणों का बड़ा ऐलान: ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’, नेताओं की एंट्री बैन
आक्रोशित ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है. ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर जल्द ही सड़क का निर्माण नहीं हुआ, तो आगामी चुनावों में वोट का पूरी तरह से बहिष्कार किया जाएगा. साथ ही, ग्रामीणों ने गांव के बाहर बोर्ड लगाने का ऐलान किया है कि चुनाव में कोई भी नेता प्रचार के लिए गांव में एंट्री न करे.

