राजस्थान इस समय भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप की चपेट में है. झीलों की नगरी उदयपुर में भी पारा रिकॉर्ड तोड़ते हुए 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच चुका है. इस जानलेवा गर्मी से न सिर्फ आम इंसान, बल्कि मूक वन्यजीव और पक्षी भी बेहाल हैं. ऐसे में उदयपुर के ऑक्सीजन हब कहे जाने वाले ऐतिहासिक ‘गुलाब बाग’ में पक्षियों को हीटवेव (लू) से बचाने के लिए वन विभाग द्वारा विशेष और पुख्ता इंतजाम किए गए हैं.
प्रदेश का पहला बर्ड पार्क: कूलर और ग्रीन नेट से मिली राहत

गुलाब बाग में स्थित प्रदेश का पहला अत्याधुनिक ‘बर्ड पार्क’ इन दिनों पक्षियों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरत रहा है. तेज धूप और गर्म हवाओं के थपेड़ों से पक्षियों को बचाने के लिए उनके पिंजरों को चारों तरफ से ‘ग्रीन नेट’ (हरी जाली) से ढका गया है, ताकि सीधी धूप पिंजरों के अंदर न आ सके. इसके साथ ही, पक्षियों के अनुकूल तापमान बनाए रखने के लिए बड़े आकार के कूलर लगाए गए हैं, जो दिनभर ठंडी हवा देते हैं.
नमी बनाए रखने के लिए लगाए गए ऑटोमैटिक फव्वारे

पिंजरों और बर्ड पार्क के वातावरण में ठंडक और प्राकृतिक नमी बनाए रखने के लिए वन विभाग ने जगह-जगह विशेष फव्वारे (फॉगर्स) भी स्थापित किए हैं. इन फव्वारों से निकलने वाली हल्की फुहारें वातावरण को सूखा होने से बचाती हैं और पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास जैसा अहसास कराती हैं.
विदेशी और ठंडे देशों के पक्षियों का रखा जा रहा विशेष ध्यान
गुलाब बाग के फॉरेस्टर राजेंद्र कुमार ने बताया कि बर्ड पार्क में इस समय विभिन्न प्रजातियों के 300 से अधिक पक्षी मौजूद हैं. तेज गर्मी को देखते हुए इन सभी के लिए अलग-अलग तरह की व्यवस्थाएं की गई हैं.
“बर्ड पार्क में कई पक्षी ऐसे हैं जो ठंडे देशों और ठंडी जलवायु के आदि हैं. उन्हें उदयपुर की इस 43 डिग्री वाली गर्मी से बचाना हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है. इसीलिए उनके पिंजरों में कूलर, ग्रीन नेट और फव्वारों का त्रिस्तरीय सुरक्षा कवच तैयार किया गया है. इसके साथ ही, पक्षियों के खान-पान और पानी के बर्तनों की नियमित निगरानी की जा रही है.” – राजेंद्र कुमार, फॉरेस्टर (गुलाब बाग)

