
उदयपुर के भैसड़ा कला गांव में आयोजित प्रशासनिक सेवा शिविर के दौरान पट्टों और आबादी विस्तार की मांग को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा. तीन साल से लंबित मांगों पर कोई कार्रवाई न होने से नाराज ग्रामीणों ने न केवल शिविर का बहिष्कार किया, बल्कि हंगामे के बीच नायब तहसीलदार और अन्य सरकारी कार्मिकों को राजीव गांधी सेवा केंद्र के भवन के अंदर बंद (बंधक) कर दिया. इस घटना के बाद शिविर में भारी तनाव फैल गया और प्रशासन को स्थिति संभालने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी.
“पट्टे नहीं दे सकते, तो शिविर का क्या मतलब?”
सोमवार को आयोजित इस शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे थे. पट्टे न मिलने और आबादी विस्तार का काम अटका होने से नाराज लोगों ने केंद्र के बाहर जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया. ग्रामीणों का कहना था, “अगर इन शिविरों में भी हमें हमारा हक और पट्टे नहीं मिल पा रहे हैं, तो ऐसे आयोजनों का क्या मतलब है?”
3 साल से अटका है आबादी विस्तार का प्रस्ताव
स्थानीय ग्रामीण नवल राम डांगी ने बताया कि पंचायत क्षेत्र में आबादी विस्तार की मांग लंबे समय से चल रही है.
- साल 2023 में आबादी विस्तार का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था, लेकिन आज तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.
- अब प्रशासन द्वारा प्रक्रिया को लंबा खींचते हुए नया प्रस्ताव उदयपुर विकास प्राधिकरण (UDA) को भेजने की बात कही जा रही है.
- ग्रामीणों का आरोप है कि जब तक आबादी विस्तार की प्रक्रिया पूरी नहीं होगी, तब तक उन्हें पट्टे नहीं मिल सकेंगे, जिससे उनके सभी जरूरी काम अटक गए हैं.
लगातार दूसरे शिविर में हुआ विरोध
गौरतलब है कि उदयपुर जिले में प्रशासनिक शिविरों के प्रति ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है. पिछले दिनों इन शिविरों के शुभारंभ के पहले ही दिन उदयपुर शहर के नजदीक चीरवा गांव में भी ग्रामीणों ने ऐसा ही विरोध करते हुए शिविर का पूर्ण बहिष्कार कर दिया था. हालांकि, तब बड़गांव एसडीएम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली थी.

