उदयपुर शहर के शोभागपुरा इलाके में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ‘सेरविक एस्थेटिक क्लीनिक’ पर छापा मारा है. यह क्लीनिक न केवल बिना किसी वैध लाइसेंस के संचालित हो रहा था, बल्कि यहां नियमों को ताक पर रखकर जटिल उपचार किए जा रहे थे. मामला तब उजागर हुआ जब इलाज के दौरान एक मेडिकल छात्रा की त्वचा झुलस गई.

लापरवाही से झुलसी मेडिकल छात्रा की त्वचा
सीएमएचओ डॉ. अशोक आदित्य ने बताया कि गीतांजलि मेडिकल कॉलेज की कम्युनिटी मेडिकल स्टूडेंट डॉ. सोनल जोशी ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी. डॉ. सोनल ने क्लीनिक से 25 हजार रुपए का लेजर ट्रीटमेंट पैकेज लिया था. आरोप है कि पहली ही सिटिंग के दौरान क्लीनिक की लापरवाही से उनकी त्वचा बुरी तरह झुलस गई. जब उन्होंने अपना इलाज रुकवाकर रिफंड मांगा, तो क्लीनिक संचालिका डॉ. स्वलेहा खातून ने न केवल पैसे लौटाने से इनकार कर दिया, बल्कि उन्हें ब्लैकलिस्ट भी कर दिया.
बीडीएस की डिग्री और हेयर ट्रांसप्लांट का काम
विभाग की टीम जब निरीक्षण करने पहुंची तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. क्लीनिक संचालिका डॉ. स्वलेहा खातून के पास केवल बीडीएस (डेंटल) की डिग्री है. नियमानुसार, एक बीडीएस डॉक्टर हेयर ट्रांसप्लांट या विशेषज्ञ लेजर ट्रीटमेंट नहीं कर सकता. जांच में यह भी पाया गया कि संचालिका के पास न तो क्लीनिक संचालन का कोई वैध लाइसेंस था और न ही लेजर ट्रीटमेंट प्रदान करने की अनुमति.
जांच कमेटी गठित, होगी कानूनी कार्रवाई
सीएमएचओ डॉ. अशोक आदित्य ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच कमेटी का गठन कर दिया है. डॉ. आदित्य ने स्पष्ट किया कि बिना विशेषज्ञता और बिना लाइसेंस के इस तरह के क्लीनिक चलाना जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है. कमेटी की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद क्लीनिक को सील करने और संचालिका के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है.

