राजस्थान के उदयपुर में गुरुवार को आदिवासी समाज ने अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और अधिकारों को लेकर हुंकार भरी. डूंगरपुर से कांग्रेस विधायक गणेश गोगरा के नेतृत्व में सैकड़ों आदिवासियों ने संभागीय आयुक्त कार्यालय के बाहर ज़ोरदार प्रदर्शन किया. समाज की मुख्य मांग है कि आगामी जनगणना में आदिवासियों के लिए एक अलग ‘आदिवासी धर्म कोड’ निर्धारित किया जाए.
“हमारा कोई धर्म नहीं, हम प्रकृति के पूजक हैं”
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए विधायक गणेश गोगरा ने दो-टूक शब्दों में कहा कि आदिवासी समाज न तो हिंदू है, न मुस्लिम और न ही ईसाई. उन्होंने कहा, “हमारी अपनी एक विशिष्ट पहचान है. हम प्रकृति के पूजक हैं और हमारी जड़ें मिट्टी से जुड़ी हैं. हमें किसी दूसरे धर्म की श्रेणी में बांधना पूरी तरह गलत है.” विधायक ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस पहचान को मान्यता नहीं दी, तो आदिवासियों की संस्कृति और उनके जल-जंगल-जमीन के अधिकार खतरे में पड़ जाएंगे.
इतिहास का हवाला: 1951 तक था अलग कोड
विधायक गोगरा ने ऐतिहासिक तथ्यों को रखते हुए बताया कि वर्ष 1871 से 1951 तक आदिवासियों की गणना एक अलग श्रेणी में की जाती थी और उनके लिए कोड नंबर 9 आवंटित था. उन्होंने सवाल उठाया कि जब कम आबादी वाले जैन धर्म के लिए अलग कोड हो सकता है, तो करोड़ों की आबादी वाले आदिवासी समाज को इस हक से वंचित क्यों रखा जा रहा है?
जनगणना 2026 और वजूद की लड़ाई
रैली में मौजूद युवाओं और समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि जनगणना 2026 में अलग कोड नहीं मिला, तो उनकी गिनती अन्य धर्मों में कर दी जाएगी, जिससे समाज की मूल पहचान समाप्त हो जाएगी.
प्रदर्शन की मुख्य बातें:
- ज्ञापन: समाज के प्रतिनिधियों ने संभागीय आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें केंद्र सरकार तक पहुंचाने की अपील की.
- चेतावनी: विधायक ने स्पष्ट किया कि यह केवल शुरुआत है; मांगें पूरी न होने पर आंदोलन और उग्र होगा.
- उद्देश्य: अपनी आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व और सांस्कृतिक विरासत को बचाना.
उदयपुर: जनगणना में ‘आदिवासी धर्म कोड’ की मांग, विधायक गणेश गोगरा ने संभागीय आयुक्त को सौंपा ज्ञापन

