उदयपुर नेशनल डॉक्टर्स डे (1 जुलाई) के मौके पर झीलों की नगरी उदयपुर में आज एक ऐतिहासिक नजारा देखने को मिला. चिकित्सा क्षेत्र को सुरक्षित और भयमुक्त बनाने का संदेश देने के लिए आज शहर में करीब 10,000 डॉक्टर्स सड़कों पर उतरे. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के आह्वान पर आयोजित इस विशाल सद्भावना रैली के जरिए चिकित्सकों ने आम जनता से अस्पतालों में शांति बनाए रखने और डॉक्टरों पर बढ़ते हमलों को रोकने की अपील की.

गांधी ग्राउंड से शुरू हुई रैली, समाज के हर वर्ग ने दिया समर्थन
यह भव्य रैली शहर के गांधी ग्राउंड से शुरू हुई। इसके बाद चेतक सर्कल, कोर्ट चौराहा, कलेक्ट्रेट, देहली गेट चौराहा, अश्विनी बाजार और हाथी पोल होते हुए पुनः गांधी ग्राउंड पहुंचकर संपन्न हुई. रैली में शामिल हजारों चिकित्सक हाथों में तख्तियां लिए हुए थे, जिन पर अस्पतालों को सुरक्षित क्षेत्र घोषित करने और मरीजों व परिजनों से डॉक्टरों का सम्मान करने के संदेश लिखे थे. इस अनूठी रैली को शहर के व्यापारिक, सामाजिक और हर वर्ग के लोगों का भरपूर समर्थन मिला.
“मरीज की जान बचाना हमारा लक्ष्य, पर परिजनों को समझनी होगी हमारी सीमाएं”
रैली का नेतृत्व कर रहे आईएमए (IMA) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. आनंद गुप्ता ने मीडिया से मुखातिब होते हुए हालिया घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। डॉ. गुप्ता ने कहा, “बीते कुछ दिनों में उदयपुर सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में चिकित्सकों पर हमले और मारपीट की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं. इन हालातों के चलते अब चिकित्सक गंभीर मरीजों का उपचार करने से भी डरने लगे हैं.
उन्होंने आगे भावुक अपील करते हुए कहा कि हर डॉक्टर का पहला और आखिरी प्रयास यही होता है कि वह अपने मरीज की जान बचाए. लेकिन चिकित्सा विज्ञान की भी अपनी कुछ सीमाएं होती हैं, कई बार तमाम कोशिशों के बाद भी मरीज को नहीं बचाया जा पाता. ऐसे में परिजनों को कानून हाथ में लेने के बजाय डॉक्टरों की सीमाओं को समझना चाहिए। डॉक्टरों के साथ हिंसा किसी भी सूरत में जायज नहीं है.

