
उदयपुर सरकारें और जनप्रतिनिधि ग्रामीण विकास को लेकर चाहे जितने बड़े-बड़े दावे कर लें, लेकिन धरातल पर आज भी कई गांवों की किस्मत अंधकार में है. ऐसा ही एक मामला उदयपुर जिले की बड़गांव पंचायत समिति के तहत कतार ग्राम पंचायत से सामने आया है. यहाँ के राजस्व ग्राम पेली भागल में आजादी के दशकों बाद भी सड़क नहीं बनने से परेशान आदिवासी ग्रामीणों ने आखिरकार प्रशासन के आगे हाथ फैलाना बंद कर दिया और खुद चंदा जुटाकर रास्ता निर्माण कर विकास की नई इबारत लिख दी.
35 आदिवासी परिवारों का दर्द, जनप्रतिनिधियों ने नहीं सुनी पुकार
पेली भागल गांव में करीब 35 से अधिक आदिवासी परिवार निवास करते हैं. गांव तक पहुंचने का रास्ता एक खड़ी और बेहद ऊबड़-खाबड़ घाटी से होकर गुजरता है. ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई सालों तक विधायक, सांसद, सरपंच और प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काटे, ढेरों ज्ञापन सौंपे, लेकिन सिर्फ कोरे आश्वासन मिले.
सड़क न होने से बच्चों का स्कूल जाना दूभर था और बीमार मरीजों को अस्पताल पहुंचाना किसी जंग से कम नहीं था. स्थिति यह थी कि बाइक सवारों को घाटी चढ़ाने के लिए पीछे से धक्का लगाना पड़ता था और मानसून के दिनों में गांव का संपर्क पूरी तरह कट जाता था.
आपसी सहयोग और श्रमदान से तैयार की राह
प्रशासनिक उपेक्षा से तंग आकर ग्रामीणों ने आत्मनिर्भर बनने की ठानी. गांव के लोगों ने आपस में बैठक की, बजट के लिए चंदा इकट्ठा किया और खुद ही फावड़े-तगाड़ी उठाकर श्रमदान में जुट गए. ग्रामीणों ने इस दुर्गम रास्ते पर गिट्टी, बोल्डर और पत्थर डालकर इसे चलने लायक अस्थायी सड़क का रूप दे दिया है.
दावों और हकीकत के बीच बड़ा अंतर
ग्रामीणों का कहना है कि यह एक अस्थायी समाधान है, बारिश में यह रास्ता फिर खराब हो सकता है. जब सरकार हर गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने का दम भरती है, तब पेली भागल की यह स्थिति सरकारी दावों की पोल खोलती है. ग्रामीणों ने अब प्रशासन से मांग की है कि इस रास्ते का सर्वे करवाकर जल्द से जल्द पक्की डामर सड़क बनाई जाए ताकि उन्हें स्थायी राहत मिल सके.

