प्रतापगढ़ राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के जलोदा जागीर गांव से विकास के दावों की पोल खोलती एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है. यहाँ एक बुजुर्ग के अंतिम संस्कार के बाद, शोक में डूबे ग्रामीणों को मजबूरन एक बेहद दूषित और गंदे पानी के स्रोत में नहाना पड़ा. ग्रामीणों का कहना है कि यह मजबूरी किसी एक दिन की नहीं है, बल्कि गांव में बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण उन्हें हर बार इसी नारकीय संकट से गुजरना पड़ता है.
पनघट और सामुदायिक स्नानघर न होने से संकट
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, गांव में बुनियादी सुविधाएं जैसे पनघट, घाट या कोई सामुदायिक स्नानघर उपलब्ध नहीं है. इस वजह से जब भी गांव में किसी का निधन होता है, तो अंतिम संस्कार के बाद पुरुषों और महिलाओं दोनों को इसी दूषित जल स्रोत पर निर्भर रहना पड़ता है. हैरानी की बात यह है कि जिस जल स्रोत का इस्तेमाल ग्रामीण नहाने के लिए कर रहे हैं, उसी जगह मवेशी भी पानी पीते हैं. करीब एक साल से इस जल स्रोत की कोई सफाई नहीं हुई है, जिसके कारण पानी पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है और अब गांव में गंभीर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है.
सीएम के दौरे पर भी दी थी सूचना, नहीं हुई सुनवाई
ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में मुख्यमंत्री के दौरे के वक्त भी स्थानीय प्रशासन को इस गंभीर समस्या और पानी की किल्लत के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई थी. बावजूद इसके, प्रशासनिक अधिकारियों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया. व्यवस्था में कोई सुधार न होने से अब ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है. प्रशासन की इस लंबी बेरुखी और अनदेखी से नाराज गांव की महिलाओं ने अब साफ शब्दों में आगामी चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी दे दी है. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक गांव में बुनियादी सुविधाओं का विकास नहीं होता, वे मतदान नहीं करेंगे.

