डूंगरपुर जिले में बाल विवाह के खिलाफ प्रशासन और पुलिस ने एक बार फिर मुस्तैदी दिखाते हुए एक मासूम का जीवन बर्बाद होने से बचा लिया. जिला बाल अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की सतर्कता के चलते सदर थाना क्षेत्र के माथुगामडा गांव में होने जा रहे एक बाल विवाह को ऐन वक्त पर रुकवा दिया गया. बालिका की आज ही शादी होने वाली थी और घर में उत्सव का माहौल था, लेकिन मंडप सजने से पहले ही प्रशासनिक टीम ने दस्तक दे दी.
गुप्त सूचना पर हुआ त्वरित एक्शन
चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के समन्वयक मेहुल शर्मा ने बताया कि हेल्पलाइन टीम को माथुगामडा गांव से एक अत्यंत गोपनीय सूचना मिली थी. सूचना में बताया गया था कि गांव की एक नाबालिग लड़की का विवाह करवाया जा रहा है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए समन्वयक मेहुल शर्मा ने बिना वक्त गंवाए तुरंत जिला प्रशासन और सदर थाना पुलिस को पूरी स्थिति से अवगत कराया.
दस्तावेजों की जांच में खुली पोल
प्रशासनिक अमला तुरंत हरकत में आया और सदर पुलिस, गिरदावर, पटवारी, सृष्टि सेवा समिति तथा चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया. यह संयुक्त टीम आनन-फानन में माथुगामडा गांव में बालिका के घर पहुंची. टीम ने मौके पर पहुंचकर जब बालिका के आयु संबंधी (शैक्षणिक व जन्म) दस्तावेजों की गहनता से जांच की, तो उसकी वास्तविक उम्र 17 वर्ष 10 महीने पाई गई. कानूनन विवाह के लिए लड़की की उम्र न्यूनतम 18 वर्ष होनी अनिवार्य है.
परिजनों को किया गया पाबंद
बालिका के नाबालिग होने की पुष्टि होते ही संयुक्त टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए विवाह की रस्मों और आयोजन को मौके पर ही रुकवा दिया. इसके साथ ही टीम ने बालिका के माता-पिता और उपस्थित परिजनों को बाल विवाह के कानूनी दुष्परिणामों की जानकारी दी. प्रशासन ने माता-पिता को सख्त हिदायत देते हुए पाबंद किया है कि वे कानूनी उम्र (18 वर्ष) पूरी होने से पहले अपनी बेटी की शादी किसी भी सूरत में नहीं करेंगे.

