राजस्थान के प्रतापगढ़ की सेशन कोर्ट ने शादी का दबाव बना रही प्रेमिका की हत्या करने के बहुचर्चित मामले में शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अदालत ने मुख्य आरोपी को आजीवन कारावास (उम्रकैद) और उसके सहयोगी को 5 वर्ष के कठोर कारावास की सजा से दंडित किया है. कोर्ट के इस फैसले के बाद दोनों अपराधियों को कड़ी सुरक्षा के बीच जेल भेज दिया गया.
क्या था पूरा मामला?
लोक अभियोजक तरुण दास बैरागी के अनुसार, यह घटना पिछले साल की है. 22 फरवरी 2024 को कोतवाली थाना पुलिस को प्रतापगढ़ शहर के बाईपास रोड पर एक अज्ञात युवती का शव पड़े होने की सूचना मिली थी. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की, तो मामला प्रथम दृष्टया हत्या का नजर आया। इसके बाद पुलिस ने गहन तकनीकी और जमीनी अनुसंधान शुरू किया.
शादी के दबाव से परेशान होकर की हत्या
संदेह के आधार पर पुलिस ने पीपलफूट के लंबा डबरा निवासी कुलदीप मीणा को हिरासत में लेकर पूछताछ की. कड़ाई से पूछताछ करने पर कुलदीप ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उसने बताया कि मृतका उसकी प्रेमिका थी और वह उस पर लगातार शादी करने का दबाव बना रही थी. इसी बात से तंग आकर उसने युवती के ही दुपट्टे से गला घोंटकर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी.
शव को ठिकाने लगाने में दोस्त ने की मदद
हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद, मुख्य आरोपी कुलदीप ने साक्ष्यों को छुपाने के लिए अपने मित्र अनिल मीणा (निवासी लंबा डबरा) को बुलाया. दोनों ने शव को एक मोटरसाइकिल पर बीच में रखा और प्रतापगढ़ बाईपास स्थित एक सुनसान इलाके में ले जाकर फेंक दिया. पुलिस ने मुख्य आरोपी की निशानदेही पर सह-आरोपी अनिल को भी गिरफ्तार कर अदालत में चालान पेश किया था.
16 गवाह और 49 दस्तावेजों के आधार पर सजा
मामले की अंतिम सुनवाई करते हुए सेशन जज आशा कुमारी ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया. अदालत ने मुख्य आरोपी कुलदीप मीणा को आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. वहीं, शव को ठिकाने लगाने में सहयोग करने वाले सह-आरोपी अनिल मीणा को 5 वर्ष के कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया. अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष 16 गवाहों के बयान और 49 पुख्ता दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए, जिसके आधार पर कोर्ट ने यह सख्त फैसला सुनाया.

