बांसवाड़ा राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और जान-माल की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए जिला प्रशासन ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है. अब जिले में सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए दुपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है. जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (SP) ने संयुक्त रूप से एक विशेष एडवाइजरी जारी कर साफ चेतावनी दी है कि नियम तोड़ने वाले सरकारी स्टाफ के खिलाफ यातायात नियमों के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
‘पहले हेलमेट-फिर वाहन’: कर्मचारियों को बनना होगा रोल मॉडल
जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय द्वारा जारी इस कड़े आदेश में स्पष्ट किया गया है कि राजकीय अधिकारियों और कर्मचारियों से यह अपेक्षा है कि वे स्वयं अनिवार्य रूप से हेलमेट का उपयोग करें. ऐसा करके वे अपने परिवार, सहकर्मियों और आम जनता के सामने यातायात नियमों की पालना का एक आदर्श उदाहरण पेश करें. प्रशासन का मानना है कि जब सरकारी अमला खुद नियमों का पालन करेगा, तभी जनता में भी सकारात्मक संदेश जाएगा.
एडवाइजरी की 3 बड़ी बातें, जिन पर रहेगा सख्त पहरा:
- पीछे बैठने वाली सवारी के लिए भी नियम लागू: दुपहिया वाहन चलाते समय केवल चालक ही नहीं, बल्कि पीछे बैठी सवारी (पिलर राइडर) को भी अनिवार्य रूप से ISI या BIS मानक का हेलमेट पहनना होगा.
- सिर्फ सिर पर रखना नहीं, स्ट्रैप बांधना जरूरी: हेलमेट को केवल चालान से बचने के लिए सिर पर रखना काफी नहीं होगा. हेलमेट की स्ट्रैप (फीता) भी ठीक प्रकार से लॉक होनी चाहिए, ताकि दुर्घटना के समय सिर सुरक्षित रहे.
- शॉर्ट ट्रिप पर भी कोई रियायत नहीं: कार्यालय आने-जाने, क्षेत्र भ्रमण, किसी भी सरकारी कार्य या निजी काम से जाते समय (चाहे दूरी कितनी भी कम क्यों न हो) बिना हेलमेट दुपहिया वाहन चलाने पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी.
विभाग प्रमुखों को सौंपी जिम्मेदारी, पुलिस करेगी औचक निरीक्षण
प्रशासन ने जिले के सभी विभाग अध्यक्षों और कार्यालय प्रमुखों को निर्देशित किया है कि वे इस एडवाइजरी को अपने अधीनस्थ काम करने वाले सभी कार्मिकों तक तुरंत पहुंचाएं और इसका शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराएं. आदेश में साफ कहा गया है कि यदि कोई भी सरकारी कर्मचारी नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो पुलिस विभाग बिना किसी ढिलाई के नियमानुसार सख्त कार्रवाई अमल में लाएगा.

