नाथद्वारा पुष्टिमार्ग की प्रधान पीठ प्रभु श्रीनाथजी मंदिर में सदियों पुरानी ‘आषाढ़ी तौल’ की अनोखी परंपरा निभाई गई. इस तौल के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि इस वर्ष देश में सामान्य से अधिक बारिश होगी और फसलों की पैदावार भी बेहतरीन रहेगी. यह सदियों पुरानी परंपरा केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि खेती-किसानी और व्यापार की दिशा भी तय करती है.
कैसे तय होता है पूरे साल का गणित?
श्रीनाथजी मंदिर के खर्च भंडार में आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को 27 प्रकार के अनाजों और भौतिक वस्तुओं को विशेष पात्रों में भरकर तौला जाता है. इसके अगले दिन, यानी श्रावण कृष्ण प्रतिपदा को प्रातः ग्वाल दर्शन के समय इन सभी वस्तुओं का दोबारा वजन किया जाता है.
दोनों दिनों के वजन में आए अंतर (बढ़ोतरी या कमी) के आधार पर पूरे साल की वर्षा, फसल, हवा के रुख और पशु-चारे का आकलन किया जाता है. तिलकायत श्री की आज्ञा से मंदिर के मुख्य पंड्या परेश नागर, खर्च भंडारी प्रकाशचंद्र सनाढ्य और कर्मचारियों की मौजूदगी में यह प्रक्रिया पूरी की गई.
किस महीने में कितनी बारिश का अनुमान?
तौल के परिणामों की जानकारी देते हुए मुख्य पंड्या परेश नागर ने बताया कि इस बार वर्षा के योग बेहद शुभ हैं. ‘आना’ प्रणाली के अनुसार:
- आषाढ़: 3 आना
- श्रावण: 5 आना
- भाद्रपद: 5 आना
- आसोज: 2 आना बारिश का अनुमान है.
इसके अलावा, हवा का रुख पूर्व दिशा की ओर रहेगा। हरा मूंग, उड़द, सरसों और घास की स्थिति सामान्य बनी रहेगी, जबकि गुड़ और नमक में हल्की कमी दर्ज की गई है.
आस्था, कृषि और व्यापार की मजबूत कड़ी
मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस तौल का प्राथमिक उद्देश्य प्रभु श्रीनाथजी की सेवा के लिए वर्षभर की आवश्यक सामग्री का अग्रिम प्रबंधन करना है. इसके साथ ही स्थानीय किसान इस आकलन के आधार पर ही फसलों की बुवाई की योजना बनाते हैं और व्यापारी अपने स्टॉक व कारोबार की रणनीति तय करते हैं.

