बांसवाड़ा प्राकृतिक सुंदरता और हरे-भरे टापुओं से घिरा ‘चाचा कोटा’ इन दिनों पर्यटकों का नया पसंदीदा ठिकाना बन चुका है. बांसवाड़ा-रतलाम मार्ग पर शहर से महज 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह खूबसूरत पिकनिक स्पॉट अपनी अद्भुत हरियाली, बैकवाटर और रोमांचक नौका विहार (बोटिंग) के लिए देश भर के सैलानियों को आकर्षित कर रहा है. वीकेंड के दौरान यहां पर्यटकों की जबरदस्त भीड़ उमड़ रही है, जिससे बांसवाड़ा शहर के तमाम होटल और गेस्ट हाउस पूरी तरह ‘हाउसफुल’ चल रहे हैं.

सोशल मीडिया ने बढ़ाई लोकप्रियता
चाचा कोटा को देश भर के पर्यटन मानचित्र पर उभारने में स्थानीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स का बड़ा योगदान रहा है. डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इसकी विहंगम तस्वीरों और रील्स के वायरल होने के बाद, विशेषकर मानसून और पोस्ट-मानसून सीजन में यहां सैलानियों की आवक कई गुना बढ़ गई है. बैकवाटर के शांत पानी में बोटिंग का आनंद लेने और प्राकृतिक छटा को करीब से देखने के लिए हर वीकेंड सैकड़ों गाड़ियां यहां पहुंच रही हैं.
बढ़ती भीड़ के साथ बुनियादी समस्याओं की चुनौती
पर्यटकों की इस अचानक बढ़ी संख्या के कारण क्षेत्र में कुछ व्यवस्थागत चुनौतियां भी सामने आने लगी हैं:
- यातायात की समस्या: चाचा कोटा तक जाने वाली सड़क संकरी होने के कारण वीकेंड पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग जाता है.
- मूलभूत सुविधाओं की कमी: इतने बड़े पिकनिक स्पॉट पर पीने के साफ पानी और सार्वजनिक शौचालयों का भारी अभाव है.
- कूड़ा-कचरा: बढ़ती भीड़ के साथ स्वच्छता बनाए रखना भी एक चुनौती बनता जा रहा है.
प्रशासनिक पहल से बदल सकती है तस्वीर
स्थानीय इन्फ्लुएंसर भरत कंसारा का कहना है कि यदि राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन इस दिशा में त्वरित कदम उठाए, तो चाचा कोटा राजस्थान का एक प्रमुख और व्यवस्थित इको-टूरिज्म हब बन सकता है. सड़क का चौड़ीकरण, पार्किंग की सुचारू व्यवस्था, सार्वजनिक शौचालय और नियमित सफाई का प्रबंध इस खूबसूरत स्थल को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है, जिससे स्थानीय रोजगार को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा.

