बांसवाड़ा जिले के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र, महात्मा गांधी अस्पताल में रविवार देर रात उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब अस्पताल के रिकॉर्ड रूम की छत अचानक आग की लपटों से धधक उठी. रात करीब 11:30 बजे हुई इस घटना ने अस्पताल प्रशासन और वहां मौजूद मरीजों के परिजनों में हड़कंप मचा दिया. गनीमत रही कि समय रहते दमकल विभाग को सूचना दे दी गई, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया.
आईसीयू वार्ड के करीब पहुंची आग की लपटें
जानकारी के अनुसार, जिस रिकॉर्ड रूम की छत पर आग लगी, वह अस्पताल के आईसीयू (ICU) वार्ड के ठीक पीछे कुछ ही दूरी पर स्थित है. आग इतनी तेजी से फैली कि उसकी लपटें दूर से ही दिखाई देने लगीं. अस्पताल के सतर्क कर्मचारियों ने बिना देरी किए दमकल विभाग को सूचित किया. फायर ब्रिगेड की टीम ने मौके पर पहुंचकर कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया. राहत की बात यह रही कि आग केवल छत तक ही सीमित रही और रिकॉर्ड रूम के अंदर नहीं पहुंची, जिससे सालों पुराना महत्वपूर्ण रिकॉर्ड सुरक्षित बच गया.
अधिकारियों का तर्क: सूखी पत्तियों में लगी आग
अस्पताल के उपनियंत्रक डॉ. दामोदर गोयल ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि रिकॉर्ड रूम की छत पर पेड़ों की सूखी पत्तियां भारी मात्रा में जमा थीं. संभवतः किसी चिंगारी के कारण इन पत्तियों ने आग पकड़ ली. उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन की तत्परता से आग को नीचे दस्तावेजों तक पहुँचने से पहले ही बुझा दिया गया.
साजिश की आशंका: चर्चाओं का बाजार गर्म
प्रशासन भले ही इसे एक दुर्घटना करार दे रहा हो, लेकिन अस्पताल के गलियारों में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. कई लोग इसे ‘भ्रष्टाचार के साक्ष्य मिटाने’ की एक बड़ी साजिश के रूप में देख रहे हैं. चर्चा है कि रिकॉर्ड रूम में रखे दशकों पुराने महत्वपूर्ण दस्तावेजों को नष्ट करने के उद्देश्य से यह आग जानबूझकर लगाई गई हो सकती है. यदि आग नीचे रिकॉर्ड रूम तक पहुँच जाती, तो कई राज हमेशा के लिए दफन हो सकते थे.
लापरवाही पर उठे सवाल
इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा और रखरखाव पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं. सवाल यह उठ रहा है. कि रिकॉर्ड रूम जैसी संवेदनशील जगह, जहाँ सालों पुराने सरकारी दस्तावेज रखे हैं, उसकी छत पर इतना ज्वलनशील कचरा और सूखी पत्तियां क्यों जमा होने दी गईं? फिलहाल पुलिस और प्रशासन इस मामले की तह तक जाने का प्रयास कर रहे हैं.

