बांसवाड़ा शहर की बदहाल सड़कों और जगह-जगह बने जानलेवा गड्ढों के खिलाफ नागरिक नैतिक परिषद (शहर इकाई) ने बुधवार को जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला. सड़कों की जमीनी हकीकत से अधिकारियों को रूबरू कराने के लिए परिषद ने विरोध का एक अनोखा तरीका अपनाया. कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्टर को स्कूटी पर बैठाकर पूरे शहर का भ्रमण करने का न्योता दिया, ताकि वे खुद देख सकें कि आम जनता रोजाना किन परिस्थितियों से गुजर रही है.
गांधी मूर्ति पर आधे घंटे तक किया इंतजार
नागरिक नैतिक परिषद के पदाधिकारी और कार्यकर्ता तय कार्यक्रम के अनुसार बुधवार को शहर के गांधी मूर्ति चौराहे पर एकत्र हुए. उन्होंने जिला कलेक्टर के लिए स्कूटी की व्यवस्था भी कर रखी थी. कार्यकर्ताओं ने करीब आधे घंटे तक प्रशासन के प्रतिनिधि का इंतजार किया, लेकिन मौके पर न तो कलेक्टर पहुंचे और ना ही प्रशासन का कोई अन्य जिम्मेदार अधिकारी आया.
सड़कों का नामोनिशान गायब, कुंभकर्णी नींद में प्रशासन
नागरिक नैतिक परिषद के राष्ट्रीय महासचिव सुनील आचार्य ने प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पूरे बांसवाड़ा शहर में सड़कों का नामोनिशान गायब हो चुका है. हर तरफ केवल गड्ढे ही नजर आते हैं. इन गड्ढों के कारण लोगों की रीढ़ की हड्डी और वाहनों की हालत खराब हो रही है, लेकिन जिला प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है. निमंत्रण भेजने के बावजूद किसी प्रतिनिधि का न आना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है.
उग्र आंदोलन की चेतावनी
इस दौरान राहुल चंचावत (अध्यक्ष), सुनील आचार्य (महासचिव), जेनेन्द्र पाठक, सोनू हरिजन, सन्नी राठौर, गोविंद भूंज, राजेंद्र जोशी और पिंटू सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे. परिषद के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत का कार्य शुरू नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में और अधिक उग्र आंदोलन किया जाएगा.

