बांसवाड़ा जिले के गढ़ी थाना क्षेत्र के मादलदा गांव में शव के साथ प्रदर्शन करना और पुलिस कार्रवाई में बाधा डालना ग्रामीणों को भारी पड़ गया है. पुलिस ने शव का अनादर करने और कानून का उल्लंघन करने के आरोप में निवर्तमान गढ़ी उपप्रधान दशरथसिंह वाघेला सहित 8 नामजद और अन्य लोगों के खिलाफ ‘राजस्थान मृत शरीर का सम्मान अधिनियम 2023’ और बीएनएस (BNS) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है.
क्या है पूरा मामला?
गढ़ी थानाधिकारी रमेशचंद्र के अनुसार, 3 मई 2026 को मादलदा गांव के एक खेत में 58 वर्षीय डूंगरलाल यादव का शव मिला था. सूचना मिलने पर जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो परिजनों और ग्रामीणों ने शव को कब्जे में लेने से रोक दिया. प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे दशरथसिंह वाघेला और अन्य सहयोगियों ने मांग रखी कि जब तक मौत का कारण स्पष्ट नहीं होता और कथित आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक पोस्टमार्टम नहीं होने दिया जाएगा.
शव पर तान दिया टेंट, पुलिस से की बदसलूकी

मामला तब और गंभीर हो गया जब प्रदर्शनकारियों ने संवेदनशीलता की हदें पार करते हुए पुलिस को शव छूने तक नहीं दिया. अधिकारियों की समझाइश के बावजूद मौके पर टेंट मंगवाए गए और एक टेंट सीधे मृतक के शव के ऊपर ही लगा दिया गया. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरपत सिंह भाटी और डीएसपी बाबूलाल रैगर ने घंटों तक ग्रामीणों को समझाया कि मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम अनिवार्य है, लेकिन प्रदर्शनकारी टस से मस नहीं हुए. उनका कहना था कि ‘चाहे लाश 10 दिन तक सड़ जाए, लेकिन मांगें पूरी होने तक शव नहीं उठने देंगे.’
इन लोगों पर गिरी गाज
पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा डालने, संक्रमण फैलने का खतरा पैदा करने और मृतक के सम्मान का उल्लंघन करने के आरोप में मुख्य आरोपी दशरथसिंह वाघेला (वखतपुरा), महेश यादव, नितेश यादव, कल्पेश यादव (तीनों मादलदा), राहुल यादव, भूरालाल यादव (दोनों आमजा), अशोक यादव (परतापुर) और सुनील बुनकर के खिलाफ मामला दर्ज किया है.
पुलिस का स्पष्ट कहना है कि किसी भी स्थिति में मृत शरीर का उपयोग विरोध प्रदर्शन के लिए करना गैरकानूनी है. फिलहाल पुलिस आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है और सख्त कार्रवाई की तैयारी में है.

