डूंगरपुर राजस्थान सरकार द्वारा प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर सहित विभिन्न संवर्गों के 1267 नियमित पदों को समाप्त करने के निर्णय के खिलाफ प्रदेशभर में आक्रोश फैल गया है. इसी क्रम में मंगलवार को डूंगरपुर जिला मुख्यालय पर नर्सिंग कर्मियों ने जोरदार प्रदर्शन किया और जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर इस फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग की.
डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज पर सबसे ज्यादा मार
नर्सिंग कर्मियों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान बताया कि सरकार ने प्रदेश के 7 मेडिकल कॉलेजों से नियमित पदों को समाप्त करने का आदेश जारी किया है. चौंकाने वाली बात यह है कि इन कुल 1267 पदों में से अकेले डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज के 106 महत्वपूर्ण पदों को समाप्त कर दिया गया है. कर्मचारियों का कहना है कि डूंगरपुर जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाओं को सुदृढ़ करने के बजाय पदों में कटौती करना ‘जनहित विरोधी’ कदम है.
नियमित बनाम संविदा: भविष्य पर संकट
प्रदर्शनकारी नर्सिंग नेताओं ने तर्क दिया कि सरकार नियमित पदों को समाप्त कर उनकी जगह संविदा (Contractual) आधारित पद सृजित करने की योजना बना रही है. यह न केवल वर्तमान कर्मचारियों के मनोबल को गिराने वाला है, बल्कि नर्सिंग क्षेत्र में भविष्य तलाश रहे युवाओं के साथ भी बड़ा खिलवाड़ है. उनका कहना है कि संविदा प्रथा से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा और कर्मचारियों का शोषण बढ़ेगा.
उग्र आंदोलन की चेतावनी
कलेक्ट्रेट के बाहर नारेबाजी करते हुए नर्सिंग संघ ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने इस पद कटौती के निर्णय को जल्द वापस नहीं लिया, तो यह विरोध केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं रहेगा. आने वाले दिनों में राजस्थान के सभी प्रभावित जिलों के नर्सिंग कर्मी एकजुट होकर राजधानी जयपुर में प्रदेश स्तरीय उग्र आंदोलन और महापड़ाव शुरू करेंगे.
ज्ञापन सौंपने के दौरान भारी संख्या में नर्सिंग ऑफिसर, छात्र और चिकित्सा कर्मी मौजूद रहे. उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि उनकी भावनाओं को सरकार तक पहुँचाया जाए ताकि स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे से कोई समझौता न हो.

