भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने गुजरात के डेडियापाड़ा विधानसभा क्षेत्र से लोकप्रिय विधायक चैतर वसावा की रिहाई की मांग को लेकर देश की राष्ट्रपति के नाम जिला प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा है. प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय पर पार्टी के जिलाध्यक्ष मुकेश बरोड़ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में एकत्रित हुए कार्यकर्ताओं ने अपनी मांग बुलंद की. सौंपे गए ज्ञापन में पार्टी ने आरोप लगाया कि विधायक चैतर वसावा और उनके सहयोगियों को एक गहरी राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया है और उन्हें सात वर्ष की सजा दिलाई गई है.

जल, जंगल और जमीन की लड़ाई का मिला इनाम
पार्टी के जिलाध्यक्ष मुकेश बरोड़ सहित अन्य पदाधिकारियों ने ज्ञापन में स्पष्ट कहा कि विधायक चैतर वसावा लंबे समय से आदिवासी समाज के जल, जंगल और जमीन के संवैधानिक अधिकारों की अग्रिम पंक्ति में रहकर लड़ाई लड़ रहे हैं. पार्टी का आरोप है कि वन भूमि से जुड़े एक पुराने विवाद के मामले में उनके बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव को दबाने के लिए राजनीतिक द्वेषवश यह दंडात्मक कार्रवाई की गई है. ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने, सजा माफ करने तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष न्यायिक समीक्षा कराने की मांग की गई है.
संवैधानिक अधिकारों की समीक्षा की मांग, बड़े आंदोलन की चेतावनी
भारत आदिवासी पार्टी ने इस ज्ञापन में अनुसूचित क्षेत्रों में वन अधिकार कानून (FRA), ग्राम सभा के अधिकार, संविधान की पांचवीं अनुसूची और देश की विभिन्न उच्च अदालतों द्वारा आदिवासियों के पक्ष में दिए गए ऐतिहासिक निर्णयों का विशेष उल्लेख किया है. पार्टी ने मांग की है कि वन कानूनों और वर्तमान में की जा रही प्रशासनिक कार्रवाइयों की उच्च स्तरीय समीक्षा की जाए. साथ ही, अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों के अधिकारों की सुरक्षा पर चर्चा के लिए सभी राज्यों के राज्यपालों की एक विशेष बैठक बुलाई जाए.
पार्टी पदाधिकारियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि इस फैसले से पूरे आदिवासी समाज में भारी आक्रोश है. यदि केंद्र सरकार और महामहिम राष्ट्रपति स्तर पर इस पर शीघ्र और न्यायसंगत कार्रवाई नहीं हुई, तो भारत आदिवासी पार्टी पूरे देश में एक व्यापक और उग्र आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगी.

