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उदयपुर: दिव्यांगता को दी मात, जया महाजन ट्राई साइकिल से जोमैटो डिलीवरी कर बनीं मिसाल

कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत और हौसले बुलंद हों, तो शारीरिक सीमाएं भी रुकावट नहीं बन सकतीं. इसे सच कर दिखाया है उदयपुर की रहने वाली दिव्यांग जोमैटो डिलीवरी पार्टनर जया महाजन ने. वे अपनी ट्राई साइकिल के सहारे रोजाना शहर भर में फूड डिलीवरी करती हैं और अपने परिवार का संबल बनी हुई हैं.

कठिन परिस्थितियों में नहीं खोया धैर्य

मूल रूप से महाराष्ट्र की रहने वाली जया सालों पहले एक संस्थान के जरिए उदयपुर आई थीं और फिर यहीं बस गईं. परिवार का गुजारा उनके पति के जोमैटो डिलीवरी वर्क से चलता था, लेकिन स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उन्हें काम छोड़ना पड़ा. जब घर पर आर्थिक संकट गहराया, तब जया ने घबराने के बजाय खुद मोर्चा संभाला और ट्राई साइकिल से डिलीवरी का काम शुरू किया.

रोजाना 60 किमी का सफर, 20 ऑर्डर

जया रोजाना लगभग 15 से 20 ऑर्डर डिलीवर करती हैं, जिसके लिए उन्हें हर दिन 50 से 60 किलोमीटर ट्राई साइकिल चलानी पड़ती है। कड़कती धूप, बारिश या ठंड—हर मौसम में वे अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाती हैं. अपनी इस मेहनत से वे न केवल अच्छी कमाई कर रही हैं, बल्कि परिवार का सम्मानपूर्वक भरण-पोषण भी कर रही हैं.

बहुमुखी प्रतिभा की धनी: आर्ट टीचर से ओलंपिक का सपना

कम ही लोग जानते हैं कि जया केवल एक डिलीवरी पार्टनर ही नहीं, बल्कि एक हुनरमंद आर्ट टीचर भी हैं. उन्हें पेंटिंग का बेहद शौक है और वे कई महान हस्तियों के चित्र बना चुकी हैं. इसके अलावा वे खेलों में भी सक्रिय हैं और भविष्य में ओलंपिक में भाग लेने के लक्ष्य के साथ कड़ी तैयारी कर रही हैं.

समाज के लिए सशक्त संदेश

जया का मानना है कि महिलाओं को किसी भी स्थिति में हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।.उनका कहना है, “मुश्किलें तो आएंगी, लेकिन डटकर सामना करने पर हर राह आसान हो जाती है.” जया की यह संघर्षपूर्ण कहानी हर युवा और महिला को खुद पर विश्वास रखने और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देती है.

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