प्रतापगढ़ विश्व मानव तस्करी विरोधी दिवस सप्ताह (23 से 30 जुलाई) के उपलक्ष्य में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) प्रतापगढ़ एवं गायत्री सेवा संस्थान, उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में ‘बंधुआ मजदूरी से आजादी की ओर’ विषय पर एक दिवसीय जागरूकता व संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया.
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा DLSA अध्यक्ष आशा कुमारी ने कहा कि मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी मानवता पर एक गंभीर कलंक हैं. इनके पूर्ण उन्मूलन के लिए प्रशासन, पुलिस, न्यायपालिका और नागरिक समाज को एक मंच पर आकर संयुक्त प्रयास करने होंगे. उन्होंने गुमशुदा बच्चों और तस्करी के मामलों में तत्काल FIR दर्ज कर संवेदनशीलता से समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.
DLSA सचिव सुंदरलाल खारोल ने बताया कि पीड़ित व्यक्ति निःशुल्क विधिक सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 15100 पर संपर्क कर सकते हैं. वहीं, पारिवारिक न्यायालय के न्यायाधीश महेन्द्र दवे और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दीप्ति स्वामी ने कानूनी प्रावधानों और अधिकारियों द्वारा तुरंत प्रभावी कार्रवाई करने के दायित्वों पर प्रकाश डाला.
संवाद सत्र के दौरान न्यायविदों और अधिकारियों ने कानूनी परिभाषाएं स्पष्ट कीं:
- संवैधानिक अधिकार: ACJM संयोगिता ने बताया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत जबरन श्रम और बेगार पूरी तरह प्रतिबंधित है.
- श्रम कल्याण योजनाएं: श्रम विभाग के राहुल मेघवाल ने पीड़ितों के पुनर्वास, पंजीयन और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी.
कार्यक्रम में महाराष्ट्र के सोलापुर से मुक्त कराए गए बंधुआ मजदूरों ने अपनी आपबीती और पुनर्वास की संघर्षपूर्ण कहानी साझा की, जिससे उपस्थित लोग भावुक हो उठे.
समारोह में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जयदेव सिहाग, बलवीर सिंह, संस्था की परियोजना अधिकारी पायल कनेरिया और जिला समन्वयक रामचन्द्र मेघवाल सहित कई न्यायिक व प्रशासनिक अधिकारी और सामाजिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे.

