डूंगरपुर जिले में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया अब पूरी तरह पारदर्शी और हाई-टेक हो गई है. जिला परिवहन कार्यालय (RTO) में शुरू हुए डिजिटल ड्राइविंग ट्रैक के जरिए अभ्यर्थियों का टेस्ट लिया जा रहा है, जिससे फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार पर पूरी तरह लगाम लग गई है.
25 सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में टेस्ट
जिला परिवहन अधिकारी मनीष माथुर ने बताया कि अब अभ्यर्थियों का ड्राइविंग टेस्ट 25 हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में हो रहा है. पहले की तरह अब कोई मानवीय हस्तक्षेप नहीं रहेगा, बल्कि कैमरों की डिजिटल रिकॉर्डिंग के आधार पर ही पास या फेल तय होगा.
फर्जी और डमी उम्मीदवारों को रोकने के लिए व्यवस्था में फेस रिकॉग्निशन सिस्टम जोड़ा गया है. दोपहिया वाहन चालकों का एक बार और चारपहिया चालकों का चार अलग-अलग चरणों में फेस स्कैन किया जाता है.
कैसे होता है टेस्ट? (RF तकनीक और कड़े नियम)
असिस्टेंट नेटवर्क इंजीनियर परेश कुमार ननोमा के अनुसार, लर्निंग लाइसेंस के 1 महीने बाद प्रैक्टिकल टेस्ट होता है. टेस्ट से पहले वाहन पर आरएफ (RF) डिवाइस लगाई जाती है.
- अंक प्रणाली: कुल 100 अंकों की परीक्षा में पास होने के लिए न्यूनतम 60 अंक लाने होते हैं.
- कार चालक: तय समय में आठ (8) आकार के ट्रैक, रिवर्स पार्किंग, जंक्शन स्टॉप, एच-ट्रैक और ढलान परीक्षण पूरा करना होता है.
- बाइक चालक: ट्रैक की लाइन छूने या पैर जमीन पर टिकने पर अभ्यर्थी को तुरंत फेल माना जाता है.
क्या हैं वर्तमान परिणाम?
फिलहाल RTO में रोजाना औसतन 30 बाइक और 20 कार चालकों का टेस्ट लिया जा रहा है. कड़े नियमों के बावजूद बाइक चालकों का सफलता प्रतिशत 90% और कार चालकों का परिणाम लगभग 60% रह रहा है.

