प्रतापगढ़ जिले के सुहागपुरा थाना क्षेत्र में चरित्र पर संदेह के चलते अपनी ही पत्नी की बेरहमी से हत्या करने और साक्ष्य मिटाने के लिए शव को दुर्घटना का रूप देने वाले आरोपी पति को अदालत ने कड़ी सजा सुनाई है. सेशन जज आशा कुमारी ने आरोपी लक्ष्मण मीणा को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 30 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है.
क्या था पूरा मामला?
लोक अभियोजक तरुण दास बैरागी ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि मामला सुहागपुरा थाना क्षेत्र के पाडलिया गांव का है. 25 मई 2024 को आरोपी लक्ष्मण मीणा की दूसरी पत्नी देवली बाई का शव झनिया पुलिया के नीचे लावारिस हालत में मिला था। इस संबंध में मृतका के पुत्र महेश कुमार ने पुलिस में मामला दर्ज कराया था.
पुलिस पड़ताल में सामने आया कि आरोपी लक्ष्मण अपनी पत्नी देवली बाई के चरित्र पर बेवजह संदेह करता था, जिसके चलते घर में अक्सर मारपीट और क्लेश होता रहता था.
बेरहमी से हत्या के बाद पुलिया के नीचे फेंका था शव
घटना वाले दिन आरोपी ने देवली बाई के साथ गंभीर मारपीट की, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. इसके बाद वारदात को दुर्घटना का रूप देने और सबूत मिटाने की नीयत से आरोपी ने अपनी नाबालिग पुत्री की मदद से शव को बाइक पर लादा और झनिया पुलिया के नीचे फेंक आया.
मामले की गहन जांच के बाद सुहागपुरा पुलिस ने आरोपी लक्ष्मण को गिरफ्तार कर न्यायालय में चालान पेश किया था.
13 गवाह और 47 दस्तावेजों से सिद्ध हुआ जुर्म
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक तरुण दास बैरागी ने अदालत के समक्ष 13 गवाहों के बयान दर्ज कराए और 47 महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए. अदालत ने दोनों पक्षों की बहस और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी लक्ष्मण मीणा को हत्या का दोषी पाया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाकर जेल भेजने के आदेश दिए.

