राजस्थान के नवनिर्मित सलूम्बर जिले से एक हृदयविदारक खबर सामने आई है, जहाँ एक गरीब किसान की खून-पसीने की कमाई को आग ने पल भर में निगल लिया. जिले के बनोड़ा गांव में शुक्रवार को खेत में रखी गेहूं की तैयार फसल में अचानक भीषण आग लग गई. इस अग्निकांड में किसान की करीब 12 से 15 बोरी गेहूं जलकर पूरी तरह राख हो गई, जिससे पीड़ित परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है.
थ्रेसिंग से ठीक पहले हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, बनोड़ा निवासी किसान कन्हैयालाल मेघवाल ने अपने खेत में सालभर मेहनत कर गेहूं की फसल उगाई थी. फसल कटाई के बाद उसे खलिहान में पुलियां बनाकर रखा गया था और जल्द ही उसकी थ्रेसिंग (दाने निकालने का कार्य) होनी थी. लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था; शुक्रवार को अचानक खलिहान में रखी इन पुलियों ने आग पकड़ ली. सूखी फसल होने के कारण लपटें इतनी तेज थीं कि देखते ही देखते पूरा खलिहान आग का गोला बन गया.
ग्रामीणों के प्रयास रहे नाकाफी
आग की लपटें उठती देख आसपास के खेतों में काम कर रहे ग्रामीण और परिजन तुरंत मौके पर दौड़े. ग्रामीणों ने अपने स्तर पर पानी डालकर आग बुझाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन आग की विकरालता के आगे उनके प्रयास नाकाफी साबित हुए. अफरा-तफरी के बीच समाजसेवी विरेंद्र सिंह बोरज ने तुरंत घटना की सूचना दमकल विभाग को दी.
दमकल की मुस्तैदी से टला बड़ा नुकसान
सूचना मिलते ही सलूम्बर नगर परिषद की दमकल टीम तत्काल मौके पर पहुँची. फायरमैन देवेंद्र सिंह राठौड़ और चालक शंकरलाल की टीम ने तत्परता दिखाते हुए मोर्चा संभाला. दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया. यदि समय रहते दमकल नहीं पहुँचती, तो आग पास के अन्य खेतों और वहां रखी फसलों को भी अपनी चपेट में ले लेती.
किसान परिवार में मायूसी
इस हादसे ने कन्हैयालाल मेघवाल के परिवार को तोड़कर रख दिया है. सालभर की मेहनत और घर के सालभर के राशन की उम्मीदें चंद मिनटों में राख के ढेर में बदल गईं. फिलहाल आग लगने के कारणों का स्पष्ट खुलासा नहीं हो पाया है, लेकिन ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित किसान को उचित मुआवजा देने की मांग की है.

