उदयपुर. राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ ने शिक्षा विभाग द्वारा ग्रीष्मावकाश में की गई कटौती और लंबित शिक्षक समस्याओं को लेकर हुंकार भरी है. प्रदेशाध्यक्ष शेरसिंह चौहान के आह्वान पर जिलाध्यक्ष (प्रथम) कमलेश शर्मा व (द्वितीय) अरविंद मीणा के नेतृत्व में जिले के सैकड़ों शिक्षकों ने जिला कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल को सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया.
भीषण गर्मी में स्कूल खोलना छात्रों के स्वास्थ्य से खिलवाड़
प्रदेश अध्यक्ष शेर सिंह चौहान ने कहा कि राजस्थान जैसे विषम जलवायु वाले प्रदेश में, जहाँ जून में तापमान 45 से 50 डिग्री तक पहुँच जाता है, 21 जून से स्कूल खोलना आत्मघाती है. विभाग ने भौगोलिक परिस्थितियों को नजरअंदाज कर शिविरा पंचांग में छुट्टियों की कटौती की है. संगठन ने मांग की है कि यदि सरकार 21 जून से स्कूल संचालन पर अड़ी रहती है, तो बच्चों को ‘लू’ से बचाने के पुख्ता इंतजाम किए जाएं और शिक्षकों को इसके बदले न्यूनतम 30 पीएल (PL) अवकाश दिए जाएं.
रिक्त पद और जर्जर भवन बड़ी चुनौती
शिक्षकों ने आरोप लगाया कि विभाग धरातल की समस्याओं को सुलझाने के बजाय अव्यावहारिक नीतियां थोप रहा है. 4 वर्ष पूर्व क्रमोन्नत हुए उच्च माध्यमिक और महात्मा गांधी विद्यालयों में आज भी व्याख्याताओं के पद रिक्त हैं. कई स्कूल भवन जर्जर अवस्था में हैं, जिससे हादसों का डर बना रहता है. वहीं, पिछले 12 वर्षों से तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले नहीं हुए हैं और प्रधानाचार्य एक वर्ष से पदस्थापन का इंतजार कर रहे हैं.
सात सूत्रीय मांगें और आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन में प्रमुख मांगें शामिल हैं:
- ग्रीष्मावकाश और संस्था प्रधान अवकाश में कटौती का आदेश वापस लेना.
- पारदर्शी तबादला नीति लागू कर सभी संवर्गों के स्थानांतरण शुरू करना.
- 6 वर्षों से लंबित तृतीय श्रेणी शिक्षकों की डीपीसी (DPC) करना.
- जर्जर स्कूल भवनों के लिए बजट आवंटन और रिक्त पदों को भरना.
- पुरानी पेंशन (OPS) बहाल रखना और 2012 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टेट (TET) से मुक्ति.
चेतावनी: यदि सरकार ने शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो 17 मई को जयपुर में राज्यव्यापी धरना प्रदर्शन किया जाएगा. प्रदर्शन के दौरान नवीन व्यास, भेरूलाल कलाल, सुभाष बिश्नोई सहित सैकड़ों शिक्षक मौजूद रहे.

