बांसवाड़ा जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. खुशपाल सिंह राठौड़ ने शनिवार सुबह न सिर्फ अपने प्रशासनिक दायित्वों को निभाया, बल्कि इंसानियत की एक अनूठी मिसाल भी पेश की. अमूमन वीआईपी मूवमेंट या बड़े अधिकारियों के काफिले सड़क हादसों को देखकर आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन डॉ. राठौड़ ने संवेदनशीलता दिखाते हुए बीच सड़क पर बैठकर एक घायल की जान बचाई और लोगों के लिए ‘देवदूत’ साबित हुए.
निरीक्षण पर जाते समय दिखा हादसा, तुरंत रुकवाई गाड़ी
जानकारी के अनुसार, CMHO डॉ. खुशपाल सिंह राठौड़ शनिवार सुबह विभागीय निरीक्षण के लिए अपनी सरकारी गाड़ी से घाटोल की ओर जा रहे थे. इसी दौरान घाटोल रोड पर देवदा के समीप उन्हें सड़क किनारे एक दुर्घटनाग्रस्त बाइक और पास ही लहूलुहान हालत में दर्द से तड़पता हुआ एक युवक दिखाई दिया. युवक को गंभीर अवस्था में देखकर डॉ. राठौड़ ने एक पल भी नहीं गंवाया और तुरंत अपनी गाड़ी रुकवाकर सीधे घायल के पास पहुंचे.
सरकारी वाहन से निकाला फर्स्ट-एड किट, खुद की ड्रेसिंग
डॉ. राठौड़ ने बताया कि वे अपनी गाड़ी में हमेशा एक ‘फर्स्ट-एड किट’ (प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स) साथ रखते हैं. एक डॉक्टर होने के नाते उन्होंने मौके पर ही मोर्चा संभाला. वे सड़क पर ही बैठ गए और घायल युवक के घावों को साफ कर उसकी प्रॉपर ड्रेसिंग की, जिससे बहता हुआ खून रुक गया और तड़पते हुए युवक को काफी राहत मिली. प्राथमिक उपचार देने के साथ ही उन्होंने तुरंत एम्बुलेंस को कॉल किया और युवक को त्वरित इलाज के लिए घाटोल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) भिजवाया. चिकित्सकों के अनुसार युवक के बाएं पैर में दो जगह फ्रैक्चर हुआ है.
प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा- ‘साहब हो तो ऐसा’
हादसे के वक्त मौके पर राहगीरों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा थी. चिकित्सा विभाग के सबसे बड़े जिले के मुखिया को इस तरह जमीन पर बैठकर एक आम नागरिक की जान बचाते देख वहां मौजूद हर शख्स ने उनके इस सेवाभाव की खुले दिल से सराहना की. लोगों का कहना था कि अगर हर जिम्मेदार अधिकारी इसी तरह संवेदनशीलता दिखाए, तो सड़क हादसों में होने वाली मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है.

