उदयपुर शहर के सुखेर थाना क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध चीरवा टनल में अचानक पहाड़ का हिस्सा ढहने और कई लोगों के मलबे में दबने की सूचना से हड़कंप मच गया. सूचना मिलते ही NDRF, SDRF, सिविल डिफेंस, पुलिस, NHAI और चिकित्सा विभाग की गाड़ियां सायरन बजाते हुए मौके पर पहुंचीं. हालांकि, कुछ ही देर में स्थिति स्पष्ट हुई कि यह कोई वास्तविक हादसा नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन की तैयारियों और रिस्पॉन्स टाइम को परखने के लिए आयोजित की गई एक संयुक्त मॉक ड्रिल थी.


आपसी समन्वय से चला रेस्क्यू ऑपरेशन


मॉक ड्रिल के दौरान टीमों ने टनल के भीतर फंसे लोगों को त्वरित और सुरक्षित बाहर निकालने, घायलों को मौके पर ही प्राथमिक उपचार देने तथा एम्बुलेंस के जरिए ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अस्पताल पहुँचाने का सफल अभ्यास किया.
अधिकारियों ने बताया मॉक ड्रिल का महत्व
- एनडीआरएफ (NDRF) के रंजीत पटेल ने कहा कि किसी भी आपदा में शुरुआती “गोल्डन आवर” बेहद महत्वपूर्ण होता है. ऐसे अभ्यासों से टीमों की कार्यक्षमता और त्वरित फैसले लेने की क्षमता बढ़ती है.
- एसडीआरएफ (SDRF) के महेंद्र सिंह ने बताया कि टनल हादसों में सबसे पहले सटीक आकलन कर सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू शुरू करना प्राथमिकता होती है.
- NHAI के अमित जी ने कहा कि राजमार्गों पर सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिससे आपात स्थिति में सभी विभागों की भूमिका स्पष्ट रहती है.
- सिविल डिफेंस के धनेंद्र कश्यप व गोविंद जगरवाल ने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बिठाना है.
- प्रतापनगर थाना अधिकारी अजयपाल सिंह ने बताया कि पुलिस का मुख्य काम भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और रेस्क्यू टीमों को सुरक्षित माहौल प्रदान करना था, जिसे सफलतापूर्वक निभाया गया.
अधिकारियों के अनुसार, इस तरह की मॉक ड्रिल भविष्य में किसी भी वास्तविक आपदा के दौरान जनहानि को न्यूनतम करने में बेहद मददगार साबित होती हैं.

